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Jaipur: तीज की मिठाई घेवर अब बनता है 365 दिन, सालाना 200 करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार, विदेशों से भी आते हैं ऑर्डर

Traditional Indian Sweets: घेवर अब तीज-त्योहार तक सीमित नहीं रहा। यह अब सालभर में खाया जा रहा है। शादी-ब्याह से लेकर पारिवारिक और सामाजिक आयोजनों में भी घेवर लोकप्रिय मिठाई बन गया है।

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घेवर (फोटो: पत्रिका)

Ghewar Business In India: घेवर अब केवल तीज की पारंपरिक सौगात नहीं रह गया है। जयपुर का यह विशिष्ट मिष्ठान्न अब अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुका है। सात समंदर पार भी इसकी मिठास पहुंच रही है। विदेशों से ऑनलाइन ऑर्डर मिल रहे हैं, वहीं प्रवासी भारतीय अपने रिश्तेदारों के माध्यम से घेवर मंगवा रहे हैं। यहां तक कि जयपुर से गुजरने वाली ट्रेन या बस में सफर कर रहे लोग भी अपनी सीट पर ही ऑनलाइन या पारिवारिक माध्यमों से घेवर मंगवा रहे हैं। भारत ही नहीं, विदेशों में होने वाली शादी-पार्टियों के मेन्यू में भी अब घेवर शामिल होने लगा है।

रबड़ी वाले घेवर की मांग सबसे ज्यादा

घेवर अब तीज-त्योहार तक सीमित नहीं रहा। यह अब सालभर में खाया जा रहा है। शादी-ब्याह से लेकर पारिवारिक और सामाजिक आयोजनों में भी घेवर लोकप्रिय मिठाई बन गया है। विशेष रूप से रबड़ी वाले घेवर की मांग में तेज़ी से इज़ाफा हो रहा है।

घेवर में भी आए नए लेवर

परंपरागत घेवर अब नए ज़माने के साथ लेवर युक्त हो चुका है। बाजार में अब बिस्कॉफ, मैंगो, स्ट्रॉबेरी और चॉकलेट जैसे लेवर में घेवर उपलब्ध हैं। इनकी पैकिंग भी आकर्षक और गिटिंग के अनुकूल बनाई जा रही है।

सालाना कारोबार 200 करोड़ रुपए के पार


घेवर की मांग न केवल देश में, बल्कि विदेशों में भी तेजी से बढ़ रही है। ऑनलाइन माध्यमों से विदेशों से बड़ी संख्या में ऑर्डर मिल रहे हैं। अनुमान है कि घेवर का सालाना कारोबार 200 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।घेवर को जीआइ टैग मिलना चाहिए।

— अजय अग्रवाल, घेवर विक्रेता

तीन सौ साल पुरानी परंपरा

जयपुर में घेवर बनाने की परंपरा करीब 300 साल पुरानी है। वर्ष 1750 में सवाई जयसिंह पर लिखी गई एक पुस्तक में भी घेवर का उल्लेख मिलता है। उस समय ब्रिटिश अधिकारियों और राजाओं को जयपुर से घेवर भेजा जाता था।

— सियाशरण लश्करी, संस्थापक अध्यक्ष, जयपुर फाउंडेशन

स्पेशल पैकिंग से भेजा जा रहा घेवर

शहर के कई मिठाई विक्रेता अमरीका, यूके, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड्स और यूएई सहित कई देशों में घेवर भेज रहे हैं। यह घेवर 2 से 5 दिन में सुरक्षित रूप से विदेशों में पहुंच रहा है। इसके लिए विशेष पैकिंग की जाती है, ताकि मिठाई खराब न हो। विदेशों से घेवर के सालाना 10,000 से अधिक ऑर्डर मिलते हैं और यह संख्या हर साल बढ़ रही है। कई पारिवारिक समारोहों में एक साथ 100 से 200 घेवर तक भेजे जा रहे हैं।

अब 365 दिन बनने लगा घेवर

घेवर अब सालभर बन रहा है। जयपुर आने वाले पर्यटक इसका स्वाद जरूर लेते हैं और साथ में पैक करवा कर भी ले जाते हैं। त्योहारों पर तो हमें अतिरिक्त कारीगर लगाने पड़ते हैं।

— जौहरीलाल सोढ़ानी, घेवर विक्रेता

घेवर के आकार और कीमत

●बाजार में 50 ग्राम से लेकर सवा किलो तक के घेवर उपलब्ध हैं

●देशी घी का घेवर: 750 से 1200 रुपए प्रति किलो

●वनस्पति घी का घेवर: 350 से 500 रुपए प्रति किलो