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रेयर डिजीज के उपचार पर सरकार की नई नीति, रोगियों को राहत की उम्मीद, डॉक्टर व एक्सपर्ट ने कहीं ये बात…

विश्वभर में लगभग 3 मिलियन बच्चे और वयस्क इन बीमारियों से प्रभावित हैं और इनमें से कई का जीवनभर उपचार आवश्यक होता है।

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जयपुर। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आईएसआईईएम 2024 का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम में देश-विदेश से आए डॉक्टर्स ने इनबोर्न एरर्स ऑफ मेटाबॉलिज्म पर विचार-विमर्श किया और नवीनतम चिकित्सा तकनीकों की जानकारी साझा की। कांफ्रेंस में 500 से ज्यादा डॉक्टर्स ने भाग लिया।

जिसमें भारत में रेयर डिजीज़ (दुलर्भ बीमारियों) को लेकर चर्चा हुई। डॉ. रत्ना दुया पुरी ने कहा कि 80 फीसदी रेयर डिजीज़ जेनेटिक होती हैं। यानि ये एक विशेष जीन या क्रोमोसोम में दोष के कारण होती हैं। विश्वभर में लगभग 3 मिलियन बच्चे और वयस्क इन बीमारियों से प्रभावित हैं और इनमें से कई का जीवनभर उपचार आवश्यक होता है।

एसोसिएट प्रोफेसर डॉ प्रियांशु माथुर ने कहा कि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य दुर्लभ बीमारियों की पहचान और इलाज पर जागरूकता बढ़ाना है। विशेषकर उन बच्चों के लिए जो जन्म के समय सामान्य दिखते हैं, लेकिन बाद में लक्षण प्रकट होते हैं। भारत सरकार की 2021 में लागू हुई नेशनल रेयर डिजीज पॉलिसी के तहत इन दुर्लभ बीमारियों का इलाज अब बेहतर हो रहा है। राजस्थान सरकार ने भी 2024 के बजट में मेटाबॉलिक्स और जेनेटिक्स विभाग के लिए उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की घोषणा की है।

वहीं रेयर डिज़ीज इंडिया फाउंडेशन के डायरेक्टर को-फाउंडर सौरभ सिंह ने कहा कि दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए नई उम्मीदें और बेहतर भविष्य की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। नीतियों में सुधार की जरूरत है, लेकिन जिस तरह से सरकार और चिकित्सा संस्थान मिलकर काम कर रहे हैं, उससे आने वाले समय में इन चुनौतियों का हल जरूर निकलेगा। हम सभी के प्रयास से हर मरीज को सही समय पर सहायता मिल सकेगी और चिकित्सा के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखा जाएगा।

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