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साइबर ठगी का बढ़ता खतरा: एक साल में 24 लाख शिकायतें, फर्जी लिंक, निवेश और केवाईसी के नाम पर बढ़ रहे फ्रॉड

डिजिटल लेन-देन और ऑनलाइन सेवाओं के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराध भी तेज़ी से बढ़ रहा है।

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जयपुर। डिजिटल लेन-देन और ऑनलाइन सेवाओं के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के साथ देश में साइबर अपराध भी तेज़ी से बढ़ रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच वर्षों में साइबर ठगी से जुड़ी 6 करोड़ 58 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की गई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह संख्या इस बात का संकेत है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सक्रिय ठग लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं।

आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 में ही साइबर ठगी के मामलों में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस दौरान देशभर में 24 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज हुईं और ठगों ने करीब 22,495 करोड़ रुपए की ठगी कर ली। यूपीआई, फर्जी लिंक, केवाईसी अपडेट, निवेश के झांसे और ऑनलाइन जॉब के नाम पर धोखाधड़ी जैसे तरीके सबसे ज्यादा सामने आ रहे हैं।

साइबर सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल जागरूकता की कमी और जल्द मुनाफे के लालच के कारण लोग आसानी से ठगी का शिकार हो रहे हैं। कई मामलों में पीड़ितों को तब तक ठगी का अहसास नहीं होता जब तक उनके बैंक खातों से रकम नहीं निकल जाती।

इसी बीच साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने के प्रयास भी शुरू हो रहे हैं। साइबर एक्सपर्ट अंकुर चंद्रकांत ने लोगों को ऑनलाइन ठगी से बचाने के लिए जागरूकता अभियान की घोषणा की है। उनका कहना है कि यदि बड़ी संख्या में लोग इस अभियान से जुड़ते हैं तो साइबर सुरक्षा से जुड़ी ऑनलाइन क्लासेस शुरू की जाएंगी, जिनमें ऑनलाइन फ्रॉड की पहचान और उससे बचाव के तरीके बताए जाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानून या तकनीक से ही साइबर अपराध को पूरी तरह नहीं रोका जा सकता। इसके लिए आम लोगों में डिजिटल साक्षरता और सतर्कता बढ़ाना भी उतना ही जरूरी है, ताकि वे किसी भी संदिग्ध लिंक, कॉल या मैसेज से सतर्क रह सकें।