
जयपुर। प्रदेश के श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर और नागौर जिलों में पोटाश के अकूत भंडार मिले हैं। अब तक करीब 2480 मिलियन टन भण्डारों की खोज की जा चुकी है। यह खोज राज्य में क्रूड ऑयल के बाद दूसरी बड़ी खोज मानी जा रही है। खनन होने पर राजस्थान देश में इसका एक मात्र उत्पादक राज्य होगा। अभी देश में सौ फीसदी पोटाश विदेश से आता है। खोज पूरी होने के बाद इसकी खानों के क्षेत्र चिन्हित कर नीलामी की जाएगी। पोटाश की खोज क्षेत्र में बोरवेल कर की जा रही है। अब तक 68 से ज्यादा बोरवेल खोदे जा चुके हैं।
4.62 मिलियन टन की कीमत 10 हजार करोड़
गंगानगर में जीएसआई ने 1974 में खोज शुरू की थी। पहले यहां 4.62 मिलियन टन के पोटाश भंडार की कीमत 10 हजार करोड़ आंकी गई थी। अब 2476 मिलियन टन पोटाश भंडार तीन स्थानों पर और चिन्हित किए जा चुके हैं। हनुमानगढ़ व बीकानेर जिले के गांव लक्खासर, गड़ीसर, हंसेरा, अर्जनसर, जैतपुरा, भैंरूसरी में ये भंडार चिन्हित किए जा चुके हैं। भंडार 470 से 700 मीटर की गहराई पर परतों के रूप में मिल रहे हैं। पोटाश के लिए चारों जिलों के 50 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को चिन्हित कर खोज का काम किया जा रहा है। अब तक करीब 28.5 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में खोज हो चुकी है।
सोल्यूशन माइनिंग
पोटाश के भंडार जमीन के 700 मीटर अंदर तक होने से सोल्यूशन माइनिंग होगी। इसके तहत बोरवेल में कुछ पानी व सोल्यूशन छोडकऱ पोटाश को घुलनशील बनाकर बाहर निकाला जाएगा। इस तरह की माइनिंग जर्मनी व कनाडा सहित अन्य देशों में हो रही है। ऐसे में यहां भी पोटाश खनन के लिए विदेश से ही तकनीक आएगी। पोटाश फर्टीलाइजर सहित अन्य कई उपयोग में लिया जाता है।
- पोटाश की खोज को लेकर काम तेजी से चल रहा है। तीन-चार स्थानों पर खोज कर पोटाश भंडार चिन्हित किए जा चुके हैं।
जी.एस. निर्वाण, अतिरिक्त निदेशक (जियोलॉजी), बीकानेर सर्किल खान एवं भू विज्ञान विभाग।
Updated on:
12 Apr 2018, 11:17 AM IST
Published on:
12 Apr 2018, 11:03 AM IST
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