
pregnant women healthcare: जयपुर। राजस्थान सरकार ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने के लिए अब उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं पर विशेष निगरानी का फैसला किया है। सरकार का लक्ष्य है कि किसी भी मां की गोद सूनी न रहे और हर प्रसव सुरक्षित हो। इसके लिए प्रसव पूर्व जांच, समय पर उपचार, आशा सहयोगिनियों की जवाबदेही और एनीमिक महिलाओं को विशेष उपचार जैसी व्यवस्थाओं को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. अमित यादव ने मंगलवार को साप्ताहिक समीक्षा बैठक ली। बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, आशा कार्यक्रम और परिवार नियोजन सहित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।
1. उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं का फॉलोअप
प्रसव पूर्व चार जांच सेवाएं समय पर कराई जाएं और 104 जननी एक्सप्रेस का अधिकतम उपयोग हो, ताकि उपचार प्रबंधन समय पर हो सके।
2. जननी सुरक्षा योजना का शत प्रतिशत भुगतान
योजना के तहत मिलने वाली प्रोत्साहन राशि सभी लाभार्थियों तक समय पर पहुंचे, इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
3. एनीमिक महिलाओं के लिए विशेष उपचार
कम हीमोग्लोबिन वाली गर्भवती महिलाओं को नियमानुसार फेरिककार्बोक्सीमाल्टोज इंजेक्शन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
4. मातृ मृत्यु की समीक्षा अनिवार्य
मेटरनल डेथ सर्विलांस एंड रेस्पांस के तहत हर मातृ मृत्यु की गहन समीक्षा हो, ताकि कारणों की पहचान कर भविष्य में मौतों को रोका जा सके।
5. आशा सहयोगिनियों के कार्य की समीक्षा
प्रदेश में कार्यरत 54 हजार से अधिक आशा सहयोगिनियों द्वारा सबमिट किए जाने वाले मासिक क्लेम फॉर्म की नियमित समीक्षा की जाए। जो आशाएं कार्य नहीं कर रहीं या फॉर्म जमा नहीं कर रहीं, उनकी जवाबदेही तय की जाए।
अतिरिक्त मिशन निदेशक डॉ. टी. शुभमंगला ने गर्भवती महिलाओं के समय पर रजिस्ट्रेशन और चार प्रसव पूर्व जांच के डेटा अपडेट पर जोर दिया। साथ ही, आदिवासी क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव बढ़ाने और कम प्रगति वाले इलाकों में सघन मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। बैठक में निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर, अतिरिक्त निदेशक डॉ. सुशील परमार समेत विभिन्न अधिकारी उपस्थित रहे।
Updated on:
19 Aug 2025 10:21 pm
Published on:
19 Aug 2025 10:20 pm
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