
मुख्यमंत्री ने बजट में जनता और उद्योगों पर हालांकि कोई सीधा कर नहीं लगाया, लेकिन पुराने करों में राहत की लगाई जा रही उम्मीद भी पूरी नहीं हो सकी। खासकर वैट की सूची में 100 से ज्यादा वस्तुएं, जिनमें रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजें शामिल हैं, वैट दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इन वस्तुओं में मसाले, आटा, तेल, सब्जियां जैसी चीजें शामिल हैं। वहीं उद्योग को राहत पहुंचाने के लिए व्यापारियों को टैक्स बकाए में ब्याज में शत प्रतिशत छूट देने की घोषणा की गई है। सरकार का टैक्स घोषणाओं में मुख्य ध्यान जीएसटी पर केन्द्रित रहने से करों के सरलीकरण में कुछ नहीं हो पाया। नोटबंदी के बाद महंगाई से राहत की उम्मीद लगाई बैठी जनता को वैट में राहत की उम्मीद की जा रही थी। खास तौर से वैट दरों में पड़ोसी राज्यों के मुकाबले हमारे यहां ज्यादा दरों ने परेशानी पैदा कर रखी है। पेट्रेाल और डीजल पर वैट में राहत दी जाती तो नोटबंदी से जनता को उबरने में कुछ राहत मिल पाती। बजट में जीएसटी लाने के लिए प्रयास दर प्रयास की जानकारी दी गई है, लेकिन जीएसटी आने से पहले महंगाई का तोड़ निकालने के लिए कदम उठाया जाता तो अच्छा रहता।
जीएसटी की तैयारी
80 फीसदी व्यवहारी हुए पंजीकृत
- राज्य के सभी संबंधित अधिकारियों को प्रस्तावित जीएसटी के कानून संबंधी प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
- 75 अधिकारियों को आईटी मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है, जो जीएसटी नेटवर्क के संबंध में प्रशिक्षण देंगे।
- जीएसटी लागू करते समय डीलर्स की समस्याओं के निराकरण के लिए संभाग व जिला स्तर पर जीएसटी हेल्पडेस्क बनेगी।
- जीएसटी व्यवस्था में राज्य सरकार को सेवाओं पर करारोपण का अधिकार प्राप्त होगा।
- जीएसटी से राज्य का टैक्स बेस बढऩे के साथ-साथ कार्य प्रणाली में आईटी का रोल बढ़ेगा। इस व्यवस्था में मॉडल जीएसटी लॉ के तहत अधिकारियों के पदनाम भी बदलेंगे।
डीमड एसेस्मेंट स्कीम
- जीएसटी लागू होने से पूर्व वैट, एंट्री टैक्स, लग्जरी टैक्स व मनोरंजन कर अधिनियम के तहत आगामी वर्षों के कर निर्धारण के लिए डीमड एसेस्मेंट स्कीम लाई जाएगी।
- वैट नियम तहत सर्राफा, जवाहारात, पेट्रोलियम आउटलेट व टेंट डीलर्स के लिए कम्पोजिशन स्कीम जारी की गई है, कई व्यवहारी इस योजना का लाभ नहीं ले पाए।
Published on:
07 Feb 2018 02:18 pm
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