
देश के इस सबसे बड़े राज्य को शिक्षा के लिहाज से देश में दसवें पायदान पर ले जाने के पुराने दावे पूरे करने के लिए इस बजट में कुछ खास नहीं है। शिक्षा के लिए कामचलाऊ बजट ही कहा जा सकता है। शिक्षा को हम स्कूल, उच्च, तकनीकी में बांटते हैं। बजट में इन सबसे जुड़ी बाते हैं लेकिन सरकार के लिए वैचारिक प्रतिबद्धता वाला संस्कृत शिक्षा क्षेत्र इसमें अछूता नजर आया। स्कूल शिक्षा के लिए एक भी ऐसा प्रावधान नजर नहीं अया जिसमें नवीनता हो। उच्च शिक्षा में राज्य के बदहाल विश्वविद्यालयों की सुध लेने की चर्चा तक नहीं हुई है। यह जरूर है कि दो नए कौशल विश्वविद्यालयों को खोला जा रहा है। उनका राज्य के युवाओं को लाभ मिलेगा तभी सार्थकता साबित होगी। राज्य के कॉलेजों की हर स्तर पर दुर्दशा हो रही है। फैकल्टी की कमी इस कदर है कि साल भर हर जिले से समाचार आते हैं कि छात्र शिक्षकों की कमी के लिए सडक़ पर उतरे। ऐसे में उच्च शिक्षा के लिए भर्ती का जिक्र तक नहीं किया गया। जबकि स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। राज्य के प्रशिक्षित बेरोजगारों को तृतीय और द्वितीय श्रेणी शिक्षकों की भर्ती का इंतजार है। ऐसे मेंं इस दिशा में भी कोई घोषणा नहीं किया जाना युवाओं को निराश करेगा। बजट भाषण में स्कूलों के एकीकरण का उल्लेख किया गया है। राज्य में नामांकन बढऩे का जिक्र है। यह संकेत अच्छे हैं। असर रिपोर्ट के सकारात्मक नतीजे भी बताए गए लेकिन इनके आधार पर आगे की योजना क्या रहेगी? यह नजर नहीं आया। यह जरूर है कि बजट का सबसे बड़ा हिस्सा शिक्षा के खाते ही आता है। इसमेें विडंबना ये है कि आंकड़े में वेतन का हिस्सा निकाल दें तो शिक्षा के नाम पर एक रुपए में से दस पैसे भी मुश्किल से आएंगे। उम्मीद है कि अगले बजट में विजन दिखेगा।
- शिक्षा ऐसा क्षेत्र है जहां सरकार का विजन बजट में स्पष्ट दिखना चाहिए। इस मामले में बजट निराशाजनक ही है। होनहार विद्यार्थियों को स्कूटी और साइकिल देने की लुभावनी घोषणाएंड्रॉपआउट का समाधान नहीं है।
प्रो. पी.एस.वर्मा, शिक्षाविद्, पूर्व अध्यक्ष माध्यमिक शिक्षा बोर्ड
अभूतपूर्व है बजट
- शिक्षा के लिए किए गए प्रावधान अभूतपूर्व हैं। बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा पर केंद्रित बजट में डिजिटल शिक्षा की दिशा है। स्कॉलरशिप, स्कूटी, साइकिल वितरण योजना से सकारात्मक प्रतियोगी
वातावरण बनेगा।
वासुदेव देवनानी, शिक्षाराज्य मंत्री
- पुरानी घोषणाएं भी पूरी नहीं हुई है। शिक्षा के क्षेत्र में तो बजट पूरी तरह निराशाजनक है। कहां गई 15 लाख रोजगार देने की सुराज संकल्प घोषणा। एक भी भर्ती नहीं की जा रही है।
बृजकिशोर शर्मा, पूर्व शिक्षा मंत्री
Published on:
07 Feb 2018 01:26 pm
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