
राजस्थान पुलिस के इंस्पेक्टर हिमांशु सिंह राजावत एक बार फिर चर्चा में हैं। दरअसल, बीते दिनों प्रदेश के चर्चित कृपाल सिंह हत्याकांड का खुलासा करने और वांछित बदमाशों को सलाखों के पीछे तक पहुंचाने में राजावत की मुख्य भूमिका रही।
भरतपुर के कुम्हेर थाना इंचार्ज का ज़िम्मा संभाल रहे हिमांशु सिंह राजावत के नेतृत्व में पुलिस दल ने करीब तीन दिन तक के अथक प्रयासों के बाद इस चुनौतीपूर्ण लक्ष्य को प्राप्त करने में सफलता हासिल की थी और मुख्य आरोपी गैंगस्टर कुलदीप जघीना समेत 5 और मुल्जिमों को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की।
वैसे ये कोई पहली बार नहीं है जब इंस्पेक्टर हिमांशु सिंह राजावत के नेतृत्व में टीम को किसी आपराधिक मामले को सुलझाने और उसके पीछे शामिल बदमाशों को सलाखों तक पहुंचाया हो। उनकी एक के बाद एक बेहतरीन प्रदर्शन और लोगों में उनके प्रति विशवास का ही नतीजा है कि वे लोगों के बीच 'सुपर कॉप' की पहचान रख रहे हैं।
गौरतलब है कि राजस्थान पुलिस का ये स्मार्ट ऑफिसर पुलिस सेवा में होने के साथ-साथ बेहतरीन मोटिवेशनल स्पीकर भी है। सामाजिक कार्यों में भी उनकी ख़ास दिलचस्पी समय-समय पर हो हो रहे विभिन्न आयोजनों में मौजूदगी से देखी जा सकती है।
1975 को पाली में जन्मे हिमांशु का कहना है कि उन्होंने 1999 में एक सब-इंस्पेक्टर के रूप में अपनी यात्रा शुरू की। एक विवादित घटनाक्रम को यदि छोड़ दें, तो उनकी प्रतिभा और प्रदर्शन कई बार सराहनीय रही हैं।
ये था विवाद
राजस्थान के सोहराबुद्दीन शेख का एनकाउंटर 26 नवंबर 2005 को गुजरात एटीएस और राजस्थान एसटीएफ ने मिलकर किया गया था। उस समय एनकाउंटर को लेकर कई तरह के सवाल उठे थे और पुलिस अफसरों और उनकी टीम पर कई संगीन आरोप लगे थे। इनमें हिमांशु भी शामिल रहे। थे। मामला बॉम्बे हाई कोर्ट तक भी पहुंचा, जिसके बाद उन्हें 7.5 साल की जेल हुई थी।
हालांकि सालों चले मामले में कोर्ट ने हिमांशु पर लगे आरोप को झूठा माना और क्लीन चिट दे दी। हिमांशु सिंह राजावत उन लोगों में से हैं जिन्हें एक ईमानदार पुलिसकर्मी होने और लगन से अपनी ड्यूटी करने वाला माना जाता है।
Updated on:
02 Oct 2022 02:30 am
Published on:
02 Oct 2022 02:28 am
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