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Rajasthan: दो साल बनाम 5 साल पर सदन में घमासान; विपक्ष ने मुख्यमंत्री के भाषण का किया बहिष्कार, 5 बार कार्यवाही स्थगित

राजस्थान विधानसभा में शनिवार को दो साल बनाम 5 साल पर सदन में जमकर घमासान देखने को मिला। प्रतिवेदन पर चर्चा को लेकर विपक्ष ने विरोध जताया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रतिवेदन में कांग्रेस के पांच साल के कामों का जिक्र नहीं है।

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जयपुर

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Kamal Mishra

Feb 22, 2026

Rajasthan Assembly Session

राजस्थान विधानसभा (फाइल फोटो)

जयपुर। विधानसभा में शनिवार को भाजपा सरकार के दो साल बनाम कांग्रेस के 5 साल पर चर्चा के बीच सत्तापक्ष की ओर से 2 साल के कामकाज का प्रतिवेदन सदन में पेश करने और उस पर चर्चा करने को लेकर विपक्ष ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि 2 साल बनाम 5 साल पर ही चर्चा कराने के लिए मुख्यमंत्री ने कहा था। फिर क्या मुख्यमंत्री की बात का कोई महत्व नहीं। इसको लेकर सत्तापक्ष की ओर से संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल, मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग व अन्य सदस्यों ने विरोध करते हुए विपक्ष पर सदन से भगाने के आरोप लगाए।

दोनों ओर से तनातनी बढ़ने से भारी हंगामे और विपक्ष के वैल में आकर नारेबाजी करने के चलते सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित होती रही। कार्यवाही दोपहर 3.27 से शाम 6 बजे 5 बार स्थगित हुई। शाम को फिर कार्यवाही शुरू हुई और विपक्ष की नारेबाजी के बीच मुख्यमंत्री भजनलाल ने भाषण शुरू किया, लेकिन विपक्ष ने बहिष्कार कर दिया।

संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने सदन में प्रस्ताव किया कि "सरकार के 2 वर्ष प्रगति एवं उत्कर्ष 2024-25-26 प्रतिवेदन पर विचार किया जाए। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने इस पर चर्चा शुरू करने के लिए कहा तो, विपक्ष ने विरोध किया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और कांग्रेस के गोविंद सिंह डोटासरा ने यह कहते हुए विरोध किया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सदन में सरकार के 2 साल बनाम कांग्रेस के 5 साल के कामों पर चर्चा के लिए कहा था। यही निर्णय कार्य सलाहकार समिति की बैठक में हुआ था, लेकिन इस प्रतिवेदन में पूर्ववर्ती 5 साल के कामों को जिक्र नहीं है। इस दौरान पक्ष-विपक्ष की ओर से एक-दूसरे पर सदन से भागने के आरोप लगाए गए।

पक्ष-विपक्ष में यों चली बहस

टीकाराम जूली: आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि यह परिपाटी गलत है, 2 साल बनाम 5 साल के कार्यकाल के कामकाज पर चर्चा की हुई थी। बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में भी यही तय हुआ था, तो फिर 2 साल के कामकाज का प्रतिवेदन क्यों सदन में लाया गया है? इसलिए सरकार को दोबारा 2 साल बनाम 5 साल का प्रस्ताव लाकर उस पर चर्चा करानी चाहिए।

संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल : नेता प्रतिपक्ष ने जो कहा है, वो सही नहीं है। मुख्यमंत्री ने बहस की चुनौती स्वीकार करते हुए तब भी ये प्रतिवेदन सदन की पटल पर रखा था और उसी के अनुरूप विधानसभा सचिवालय ने इसे तैयार किया है। यही सभी सदस्यों को भेजा गया है। इसलिए नेता प्रतिपक्ष की आपत्तियों को खारिज किया जाए।

गोविंद सिंह डोटासरा : मुख्यमंत्री के सदन में दिए भाषण का हवाला देते हुए कहा कि कार्यवाही विवरण के पेज नंबर 127 पर लिखा है कि राजस्थान की विधानसभा सबसे बड़ी पंचायत है और 8 करोड़ जनता का प्रतिनिधित्व करती है। अगर मेरी सरकार के 2 साल के कार्यकाल और पूर्ववर्ती सरकार के 5 साल के कार्यकाल के विकास कार्यों पर बहस हो। मैं नेता प्रतिपक्ष की चुनौती को स्वीकार करता हूं कि 5 साल बनाम 2 साल के कामकाज पर बहस होनी चाहिए। तो क्या सीएम की बात की वैल्यू नहीं। भाजपा सरकार मुख्यमंत्री की बेइज्जती करवा रही है। अगर मुख्यमंत्री की बात को नहीं रखा जा रहा है तो फिर यह साबित होता है कि यह पर्ची के मुख्यमंत्री हैं। मुख्यमंत्री सदन के नेता हैं और अगर मुख्यमंत्री की बात की वैल्यू नहीं है तो फिर आप और हम लोग यहां पर क्यों हैं।

जूलीः मुख्यमंत्री ने कहा था कि मैं नेता प्रतिपक्ष की चुनौती स्वीकार करता हूं। सदन को गुमराह करने की बजाय दोबारा से इस पर प्रस्ताव लाए और फिर चर्चा कराएं।

मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्गः 2 साल के कामकाज का प्रतिवेदन डाक के जरिए सब सदस्यों के घर पहुंचाया गया है। सभी ने पढ़ भी लिया होगा। कांग्रेस सदन में चर्चा करने के बजाय सदन से भागना चाहती है। इसलिए इस तरह की भूमिका बनाई जा रही है।

डोटासराः 2 वर्ष बनाम 5 वर्ष का संशोधित प्रस्ताव दोबारा लेकर आएं, हम चर्चा करने को तैयार हैं। प्रतिवेदन तो हर विभाग का आता है तो क्या फिर हर विभाग का हर साल एक दिन चर्चा के लिए तय किया जाए। 2 साल बनाम 5 साल पर बहस होगी तो हम 100 फीसदी बहस के लिए तैयार हैं।

ऐसे स्थगित हुई कार्यवाही

  • 3.27 बजे 30 मिनट के लिए
  • 3.57 बजे 30 मिनट के लिए
  • 4.27 बजे 5 बजे तक
  • 5.09 बजे 5.45 बजे तक
  • 5.48 बजे 6 बजे तक