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लगातार 9 से 10 घंटे या इससे भी अधिक समय की सिटिंग जॉब युवाओं को असमय फैटी लिवर का शिकार बना रही है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) की एक स्टडी में आइटी सेक्टर में काम करने वाले 84 फीसदी युवाओं को फैटी लिवर का शिकार बताया गया है। इनमें सर्वाधिक 25 से 45 वर्ष आयु वर्ग के हैं। हैदराबाद के आइटी क्षेत्र के युवाओं में किए गए इस शोध के बाद केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने फैटी लिवर बीमारी को लेकर जागरुकता बढ़ाने और स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के लिए ऑपरेशन्स गाइडलाइन जारी की है।
केन्द्र ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यह समस्या सिर्फ आइटी ही नहीं, बल्कि इसके समान दिनचर्या वाले अन्य क्षेत्रों में कार्यरत युवाओं में भी है। ऐसे में समय रहते जीवन शैली में बदलाव नहीं किया गया तो आने वाले समय में देश के युवा वर्ग की सेहत को काफी नुकसान पहुंच सकता है।
आइसीएमआर की ही एक अन्य रिसर्च के मुताबिक सिर्फ फास्ट फूड खाने वालों में से 76 प्रतिशत को फैटी लिवर की समस्या है। इनमें भी बड़ी संख्या में लगातार सिटिंग जॉब वाले और घर से बाहर दूसरे शहरों में अकेले रहकर जॉब करने वाले कामकाजी युवा हैं। ऑफिस की व्यस्त दिनचर्या में फास्ट फूड, पैकेज्ड स्नैक्स और कोल्ड ड्रिंक इनकी रोजाना की डाइट का हिस्सा है। इसके अलावा देर रात तक मोबाइल का इस्तेमाल और सुबह बिना व्यायाम किए सीधे दिनचर्या शुरू कर देना भी इसके बड़े कारण हैं।
नॉन अल्कोहोलिक फैटी लिवर की समस्या लिवर की बीमारियों में बड़ा कारण है। पहले भी हुए अध्ययनों में भी यह स्पष्ट हो चुका है कि किसी अन्य बीमारी से ग्रसित नहीं रहने वाली औसत आबादी में भी राजस्थान जैसे राज्य में यह समस्या करीब 16 प्रतिशत है। उत्तरप्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, महाराष्ट्र जैसे राज्यों की सामान्य आबादी में फैटी लिवर की समस्या 20 से 25 प्रतिशत के करीब है।
डॉ.सुधीर महर्षि, गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट, एसएमएस मेडिकल कॉलेज
Updated on:
14 Aug 2025 11:04 am
Published on:
14 Aug 2025 11:03 am
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