
मोहित शर्मा.
India's First Forensic Dental Database: जयपुर. जब शव पूरी तरह सड़ चुके हों, जल चुके हो, चेहरा भी न पहचाना जाए, DNA भी मुश्किल से मिले, तब सिर्फ दांत ही आखिरी गवाह बनते हैं। इस चुनौती को हल करने के लिए गुजरात के एक शोधकर्ता ने भारत का पहला फॉरेंसिक डेंटल डेटाबेस तैयार किया है। यह Make in India का शानदार उदाहरण है और दुनिया में अपनी तरह का पहला डेटाबेस माना जा रहा है। यह डेटाबेस मार्च 2026 में पूरा हुआ है। अब इसे पुलिस, फॉरेंसिक टीम्स और डिजास्टर मैनेजमेंट एजेंसियों को उपलब्ध कराया जाएगा। अभी तक यह कहीं काम नहीं आया है। पुरानी तकनीक अहमदाबाद प्लेन क्रैश में काम आई थी।
Govt. Dental College & Hospital, Ahmedabad में विकसित इस डेटाबेस को डॉ. जयशंकर पी. पिल्लई (Forensic Dental Researcher) ने तैयार किया। उन्होंने बताया, “इस डेटाबेस का मुख्य उद्देश्य है कि जब शरीर में कोई decomposition न बचे, सिर्फ दांत बचें, तब भी पीड़ित की पहचान की जा सके।”
डेटाबेस में महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, कर्नाटक, पॉन्डिचेरी, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और तेलंगाना के डेंटल एंथ्रोपोलॉजी रिसर्चर्स का डेटा शामिल है। National Forensic Sciences University से जुड़े इस प्रोजेक्ट को फॉरेंसिक साइंस की दुनिया में क्रांति माना जा रहा है। एक वरिष्ठ विशेषज्ञ ने कहा, “यह दुनिया में अपनी तरह का पहला डेटाबेस है।”
इससे अपराध, दुर्घटना, प्राकृतिक आपदा या आतंकवादी हमलों में शव पहचानना बहुत आसान हो जाएगा। दांत सबसे मजबूत सबूत होते हैं क्योंकि वे आखिरी तक नहीं सड़ते। डॉ. जयशंकर पी. पिल्लई ने स्पष्ट किया कि यह डेटाबेस फॉरेंसिक साइंस को आगे बढ़ाएगा और Victim Identification में नई दिशा देगा। यह उपलब्धि न सिर्फ गुजरात बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है। फॉरेंसिक टीम, पुलिस और न्याय व्यवस्था को अब बिना चेहरे या DNA के भी पहचान मिल सकेगी।
अब तक भारत में दांतों से पहचान सिर्फ व्यक्ति के पुराने रिकॉर्ड पर निर्भर थी। नया डेटाबेस बिना किसी पुराने रिकॉर्ड के भी क्षेत्र, लिंग और कुछ हद तक पहचान बताएगा। अपराध, प्लेन क्रैश, बाढ़, आतंकी हमले या प्राकृतिक आपदा में जब शव पूरी तरह सड़ या जल चुके हों, तब यह डेटाबेस पुलिस और फॉरेंसिक टीम को तुरंत मदद देगा।
पुरानी फॉरेंसिक डेंटल तकनीक ने जून 2025 के अहमदाबाद एयर इंडिया प्लेन क्रैश में बड़ी भूमिका निभाई थी। आग इतनी भयंकर थी कि ज्यादातर शव पूरी तरह जल गए। डॉ. पिल्लई और उनकी टीम ने 135 जले शवों के दांतों के सैंपल लिए। उन्होंने कहा था, “दांत गर्मी सह लेते हैं।” पहले से मौजूद डेंटल चार्ट्स, रेडियोग्राफ और सेल्फी से गैप मिलाकर कई शवों की पहचान की गई। यह केस फॉरेंसिक डेंटिस्ट्री की ताकत का सबसे बड़ा उदाहरण बना।
• भारत का पहला फॉरेंसिक डेंटल डेटाबेस
• 9 राज्यों के रिसर्चर्स का डेटा शामिल
• उद्देश्य: पूरी तरह सड़े शवों में सिर्फ दांतों से पहचान
• दुनिया में अपनी तरह का पहला
• Make in India Scientific Innovation
• मुख्य योगदान: Victim Identification में नई तकनीक
• संदेश: “दांत आखिरी सबूत होते हैं, अब उन्हें सही ढंग से इस्तेमाल करेंगे।
• 2.23 लाख दांतों का विश्लेषण
• क्षेत्र पहचान – 36% सटीक
• लिंग पहचान – 63% सटीक
• अहमदाबाद क्रैश में डेंटल रोल
• 135 शवों के दांतों के सैंपल
Published on:
21 Apr 2026 02:15 pm
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