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बलात्कार केस में फंसे IG किशन सहाय मीणा पर सरकार का बड़ा एक्शन, महिला ने लगाए गंभीर आरोप

जयपुर पुलिस मुख्यालय में मानवाधिकार के आईजी किशन सहाय मीणा को राज्य सरकार ने एपीओ कर दिया। उनके खिलाफ 29 अप्रैल को महिला की शिकायत पर बलात्कार का मामला दर्ज हुआ था।

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जयपुर

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Arvind Rao

May 03, 2026

IG Kishan Sahay Meena APO

IG Kishan Sahay Meena APO (Photo Social Media)

Kishan Sahay Meena APO: जयपुर पुलिस मुख्यालय में मानवाधिकार से जुड़े महानिरीक्षक का पद संभाल रहे किशन सहाय मीणा को राज्य सरकार ने पदस्थापन की प्रतीक्षा (एपीओ) में कर दिया। बलात्कार का मामला दर्ज होने का खुलासा होने के बाद मीणा के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है।

भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी 2004 बैच के अधिकारी मीणा मौजूदा पद पर आने से पहले भी एपीओ रहे और उससे पहले निलंबित भी रहे। मीणा के खिलाफ 29 अप्रैल को एक महिला के पत्र के आधार पर जयपुर के एक थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी।

53 वर्षीय महिला ने शादी का झांसा देकर संबंध बनाने का आरोप लगाया है। मीना वर्ष 2013 में राजस्थान पुलिस सेवा से भारतीय पुलिस सेवा में पदोन्नत हुए और उसके बाद वर्ष 2015 में भी एपीओ रहे।

पीड़िता के गंभीर आरोप

महिला ने एक आईपीएस अधिकारी पर शादी का झांसा देकर अपने सरकारी आवास पर बुलाने और जबरदस्ती करने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़िता का कहना है कि जब उसने इस कृत्य का विरोध किया, तो अधिकारी ने उसके साथ मारपीट की और किसी से शिकायत न करने की धमकी दी।

इसके अलावा मीणा ने उसका मोबाइल फोन छीन लिया और बाद में वीडियो कॉल के जरिए उसे लगातार डराया-धमकाया। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पीड़िता ने दूसरे राज्य से डाक के माध्यम से अपनी शिकायत भेजी।

इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारी इसकी निगरानी कर रहे हैं और पीड़िता के बयान दर्ज किए गए।

आईपीएस अधिकारी का पक्ष

दूसरी ओर आरोपी आईपीएस अधिकारी किशन सहाय मीणा ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे अपने खिलाफ एक सोची-समझी साजिश बताया है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें जानबूझकर इस मामले में फंसाया जा रहा है।

विवादों से पुराना नाता

यह पहली बार नहीं है, जब आईपीएस किशन सहाय मीणा विवादों में आए हैं। इससे पहले झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान उनकी ड्यूटी लगाई गई थी, लेकिन वे बिना किसी पूर्व सूचना के जयपुर लौट आए थे।

चुनाव आयोग की सख्ती के बाद राजस्थान के मुख्य सचिव और डीजीपी ने उन्हें निलंबित (सस्पेंड) कर दिया था। इसके अतिरिक्त, हाल ही में एक पॉडकास्ट में दिए गए उनके बयानों पर भी काफी विवाद हुआ था।

उन्होंने प्रेमानंद महाराज और पंडित धीरेंद्र शास्त्री को अंधविश्वासी करार दिया था और भगवान, अल्लाह और वाहेगुरु को काल्पनिक बताया था। उन्होंने यह भी कहा था कि धर्मग्रंथों से हिम्मत मिलना केवल एक भ्रम है।