
जयपुर। राजस्थान में मानव अंग तस्करी मामले में आज पहली बार चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने प्रेस कांफ्रेंस कर मीडिया से बात की। ऑर्गन ट्रांसप्लांट केस में एक के बाद एक डॉक्टर्स फंसते नजर आ रहे है। फर्जी एनओसी जारी करने के मामले में अब एसएमएस हॉस्पिटल के एडिशनल सुपरिटेंडेंट डॉ राजेन्द्र बागड़ी को पद से सस्पेंड कर दिया गया है। डॉ राजेंद्र बागड़ी, डॉ अचल शर्मा और डॉ राजीव बगरहट्टा को अनुशासनात्मक कार्रवाई का नोटिस जारी किया गया है।
चिकित्सा मंत्री खींवसर ने कहा कि मामला सामने आने के बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल प्रभाव से एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित की थी। कमेटी ने भी आज अपनी रिपोर्ट दे दी है। जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य हमारी जानकारी में आए हैं। प्रदेश में 15 अस्पतालों में ह्यूमन ऑर्गन ट्रांसप्लांट किया जा रहा था। इनमें 4 सरकारी एवं 11 प्राइवेट हॉस्पिटल हैं। फर्जी एनओसी का मामला सामने आने के बाद सरकार ने सभी अस्पतालों का रिकॉर्ड जांच के लिए अपनी निगरानी में ले लिया था।
एसीएस शुभ्रा सिंह ने बताया कि जांच में सामने आया कि पिछले एक साल में करीब 945 ऑर्गन ट्रांसप्लांट हुए। इनमें से 82 सरकारी अस्पतालों में एवं 863 प्राइवेट हॉस्पिटल में हुए। इनमें से 933 का रिकॉर्ड उपलब्ध हो गया है। कुल 933 ऑर्गन ट्रांसप्लांट में से 882 किडनी और 51 लीवर के ट्रांसप्लांट थे। ट्रांसप्लांट के 269 केस ऐसे सामने आए, जिनमें डोनर और रिसीवर नजदीकी रिश्तेदार नहीं थे।
सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि एक साल में हुए कुल ट्रांसप्लांट में से 171 ट्रांसप्लांट विदेशी नागरिकों (करीब 18 प्रतिशत) के हुए। विदेशी नागरिकों के प्रत्यारोपण मुख्यतः चार अस्पतालों में हुए इनमें फोर्टिस अस्पताल में 103, ईएचसीसी में 34, मणिपाल हॉस्पिटल में 31 और महात्मा गांधी अस्पताल में 2 विदेशी नागरिकों के ट्रांसप्लांट हुए।
बता दें कि एसीबी ने 31 मार्च की देर रात एसएमएस हॉस्पिटल में छापा मारा। वहां से फर्जी एनओसी के संबंध में दस्तावेज जब्त किए थे। इस दौरान एसीबी ने एसएमएस हॉस्पिटल के सहायक प्रशासनिक अधिकारी गौरव सिंह और ईएचसीसी हॉस्पिटल के ऑर्गन ट्रांसप्लांट को-ऑर्डिनेटर अनिल जोशी को लेनदेन करते रंगे हाथों पकड़ा था। टीम ने मौके से 70 हजार रुपए और 3 फर्जी एनओसी भी जब्त किए थे।
Published on:
15 May 2024 09:41 pm
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