23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

राजस्थान : नेशनल हाइवे पर की सुखोई-मिग-जगुआर ने लैंडिंग, जानें आज का दिन क्यों है ‘ऐतिहासिक’

राजस्थान की पहली आपातकालीन हवाई पट्टी पर करीब तीन घंटे तक वायुसेना के बेड़े में शामिल कई लड़ाकू विमान तेज गर्जना के साथ उतरे और उड़ान भरी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री गडकरी इस हवाई पट्टी पर लड़ाकू विमानों के ट्रायल के साक्षी बने।

3 min read
Google source verification
India's emergency landing strip on highway in Barmer Rajasthan

बाड़मेर।

राजस्थान की धरा से आज पूरे हिंदुस्तान के लिए ऐतिहासिक दिन रहा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तथा सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने आज जालोर-बाड़मेर जिले की सीमा पर इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड (ईएलएफ) का उद्घाटन किया। इस दौरान दोनों मंत्रियों ने बाड़मेर के दक्षिण में गांधव-बाखासर सेक्शन (राष्ट्रीय राजमार्ग-925) पर इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड पर वैमानिक गतिविधियों का अवलोकन भी किया। कार्यक्रम में एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत भी मौजूद रहे।

गौरतलब है कि यह पहली बार है जब राजस्थान में किसी राष्ट्रीय राजमार्ग का उपयोग भारतीय वायुसेना के विमानों की इमरजेंसी लैंडिंग के लिए किया जाएगा।

तेज़ गर्जना के साथ लड़ाकू विमानों की लैंडिंग

राजस्थान की पहली आपातकालीन हवाई पट्टी पर करीब तीन घंटे तक वायुसेना के बेड़े में शामिल कई लड़ाकू विमान तेज गर्जना के साथ उतरे और उड़ान भरी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री गडकरी इस हवाई पट्टी पर लड़ाकू विमानों के ट्रायल के साक्षी बने। इस दौरान सुखोई एसयू-30, मिग और जगुआर जैसे लड़ाकू विमान तेज गर्जना के साथ आपातकालीन हवाई पट्टी पर लैंडिंग करवाई गई।

मीडिया से बातचीत में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा सेना की ऑपरेशनल क्षमता को बढ़ाने के लिए देश में कई स्थानों पर इस प्रकार की इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड का निर्माण किया जा रहा है। इससे प्राकृतिक आपदा की घड़ी में भी जनता को जल्द से जल्द राहत पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।

इससे पहले कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर से कुछ ही कदम दूर इस प्रकार की इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड का तैयार होना सिद्ध करता है कि भारत अपनी एकता, संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के लिए सदैव तैयार है। उन्होंने कहा कि भारत के अंदर किसी भी चुनौती का सामना करने की क्षमता है।

रिहर्सल में उतारे गए 3 फाइटर प्लेन
बुधवार को यहां रिहर्सल के तौर पर 3 फाइटर प्लेन उतारे गए। एयरफोर्स अधिकारियों की निगरानी में सुबह सबसे पहले हरक्यूलिस प्लेन को उतारा गया। इसके बाद सुखोई और मिग के साथ अगस्ता हेलीकॉप्टर की भी लैंडिंग हुई। यहां दोपहर 2 बजे तक आवागमन को भी बंद कर दिया गया। लैंडिंग के पहले से ही एयर फोर्स और पुलिस के अधिकारी पहुंच गए थे।


भारतमाला प्रोजेक्ट का हिस्सा
इसे भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत तैयार किया गया है। यह पाकिस्तान से 40 किलोमीटर दूर है। इसे वायुसेना के इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए बनाया गया है। 32.95 करोड़ रुपए की लागत से बनी यह हवाई पट्टी 3 किमी लंबी और 33 मीटर चौड़ी है। इसके दोनों तरफ 2 पार्किंग बनाई गई हैं, ताकि लैंडिंग के बाद विमानों को पार्क किया जा सके। इसके अलावा एटीसी प्लिंथ का डबल मंजिला एटीसी केबिन के साथ निर्माण किया गया है, जो पूरी तरह से वॉशरूम सुविधायुक्त है। इमरजेंसी हवाई पट्टी के पास 3.5 किमी लंबी और 7 मीटर चौड़ी सर्विस रोड भी बनाई गई है।

राष्ट्रीय राजमार्ग-925ए पर सत्ता-गांधव के 41/430 किमी से 44/430 किमी के तीन किलोमीटर लंबे हिस्से को भारतीय वायुसेना के लिये इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड (ईएलएफ) के रूप में तैयार किया है। लैंडिंग सुविधा, अभी हाल में विकसित खड़ंजे से बने ऊंचे किनारे वाले (फुटपाथ के रूप में) दो लेन के गगरिया-भाखासर तथा सत्ता-गांधव सेक्शन का हिस्सा है। इसकी कुल लंबाई 196.97 किमी है और इसकी लागत 765.52 करोड़ रुपये है। भारतमाला परियोजना से बाड़मेर और जालौर जिले के सीमावर्ती गांवों के बीच संपर्कता में सुधार होगा। यह हिस्सा पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित है और इससे भारतीय सेना की सतर्कता बढ़ेगी और देश की अधोसंरचना भी मजबूत होगी।

तीन हैलीपेड बनाए
इस इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप के अलावा वायु सेना/भारतीय सेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुये कुंदनपुरा, सिंघानिया और भाखासर गांवों में तीन हेलीपैड भी बनाए गए हैं। ईएलएफ का निर्माण 19 महीनों के भीतर कर लिया गया था। निर्माण की शुरुआत जुलाई 2019 में हुई थी।