22 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

हमारे सारथ को देखकर दहल जाता है दुश्मनों का दिल, जानें इसकी खूबियां

जयपुर अम्बेडकर सर्किल स्थित एसएमएस इनवेस्टमेंट ग्राउण्ड पर रविवार को शुरू हुई भारतीय सेना की प्रदर्शनी में 'सारथ' को प्रदर्शित किया हुआ है।

2 min read
Google source verification
Indian army exhibition in jaipur

अजय शर्मा/जयपुर। सोशल मीडिया में आजकल इजरायल, रूस, दक्षिण कोरिया, चीन और ब्रिटेन में डवलप किए जा रहे ऐेसे हथियारों के वीडियो वायरल हो रहे हैं जिनमें दिखाया गया है कि यह स्मार्ट हथियार दुश्मन को ढूंढते है, हमलाकर उसे तबाह करते हैं और बिना किसी नुकसान के लौट आते है। जमीन, पानी और हवा तीनों में ये समान रूप से कारगर है।

आज की इस परिकल्पना को करीब 30 साल पहले ही भारतीय सेना ने साकार कर लिया था। वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद रूस के सहयोग से ऐसे स्मार्ट हथियार 'सारथ' को भारतीय सेना ने अंगीकार कर लिया। आज सारथ का अपग्रेड वर्जन भारतीय सेना की विभिन्न यूनिट में अपनी बेहतरीन सेवाएं दे रहा है। यहां अम्बेडकर सर्किल स्थित एसएमएस इनवेस्टमेंट ग्राउण्ड पर रविवार को शुरू हुई भारतीय सेना की प्रदर्शनी में 'सारथ' को प्रदर्शित किया हुआ है।

यह इसकी खूबियां
एक हाथ से संहार तो दूसरे से सृजन आणुविक हमले से लेकर युद्ध के दौरान जमीन, पानी और हवा में यह अपने दुश्मनों पर काल बनकर टूट पड़ता है। इसकी खूबियां इतनी है कि सेकण्ड जनरेशन तकनीक होने के बावजूद यह आज भी कारगर है और दुश्मनों को धूल चटाने में उतना ही समर्थ है। इसमें (एनबीसी प्रॉटेक्शन) तकनीक इस्तेमाल की गई जो परमाणु, जैविक और रासायनिक हमले की जानकारी कर वह इस व्हीकल को अभेध किले में बदल देती है। इसके अंदर बैठे सैनिकों पर विकिरणों का कोई असर नहीं होता।

इस पर लगी एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल करीब चार किमी दूर तक अपने दुश्मन के छिथड़े उड़ा देती है। यह व्हीकल धुएं के बादल पैदाकर युद्ध के मैदान से एक स्थान से दूसरे स्थान पर कुछ ही देर में गायब होकर दुश्मन को चकमा दे सकता है तो नाइट फायरिंग की खूबी के चलते अंधेरे में छिपे दुश्मनों को रोशनी के जरिए सामने ला देता है। इसकी विशेष डिजायन के चलते यह पानी में तैर सकता है तो हल्के वजन के चलते इसे सड़क, रेल, जहाज और विमान के जरिए कहीं भी ले जाया जा सकता है।

इस पर विमान को मार गिराने के लिए 7.62 मिमी की मशीनगन भी लगी हुई है। 10 जवान 3 दिन तक लगातार लड़ सकते हैं युद्ध अपनी स्टोरज क्षमता के चलते यह व्हीकल 10 जवानों के साथ तीन दिन तक लगातार बिना रुके युद्ध के मैदान में डटा रह सकता है।

सारथ के कई वर्जन एम्बूलेंस, पुल बनाने, पानी के बीच राहत पहुंचाने, बिजली-सड़क सेवा बहाल करने से लेकर जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को छोडऩे के लांचिंग व्हीकल के रूप में सेना में उपयोग लिए जा रहे है। मूल रूप से रूस में बने इस इनफ्रन्ट्री कॉम्बेट व्हीकल की खूबियों को देखते हुए 80 के दशक के अंत में इसे सेना में कमीशंड किया गया। इसके बाद में मेदक स्थित भारत सरकार की आयुध फैक्ट्री में ही इसका निर्माण किया गया। अभी इसका अपग्रेड वर्जन सेना में है।








बड़ी खबरें

View All

जयपुर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग