
इस तरह की तस्वीर दरअसल, दिख रही है भारत-पाक सरहद से सटे जैसलमेर स्थित एशिया की सबसे बड़ी पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में। यहां जारी एक युद्धाभ्यास में सुबह से लेकर शाम तक गोला-बारूद के धमाकों की गूंज धरती से लेकर आसमान तक को हिला रही है। मंगलवार को कुछ इसी तरह का नज़ारा दिखा भारतीय सेना की थिएटर आर्टिलरी की ओर से हुए गोला-बारूद के परीक्षण के दौरान।
युद्ध में काम आने वाली नई तकनीकी का अभ्यास
ले. जनरल आरसी तिवारी ने पूर्वी कमान के गनर्स के प्रदर्शन की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह हमारी अदम्य भावना और अडिग शक्ति की घोषणा थी। हम आने वाली लड़ाइयों की नियति को स्वरूप देने के लिए तैयार हैं। हमारी सेनाओं की महिमा के साक्षी बनें।
ताकतवर है आर्टिलरी रेजिमेंट
गौरतलब है कि सेना की आर्टिलरी रेजीमेंट भारतीय सेना की दूसरी सबसे बड़ी शाखा है। इसका काम जमीनी अभियानों के समय सेना को मारक क्षमता प्रदान करना है। इस रेजीमेंट ने करगिल युद्ध के समय लगभग ढाई लाख गोले और रॉकेट दागे थे। इसके साथ 300 से अधिक तोपों, मोर्टार और रॉकेट लॉन्चरों ने उस दौरान प्रतिदिन लगभग 5000 बम फायर किए थे।
Published on:
28 Feb 2024 02:14 pm
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