
सुनील सिंह सिसोदिया
Rajasthan Congress: कांग्रेस में अंतर्कलह की नई कहानी शुरू हो गई है। अशोक गहलोत और पायलट के बीच खींचतान के बाद अब प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के बीच अंतर्कलह छिड़ गई है। कांग्रेस के अंतर्कलह के इस पार्ट-2 की शुरुआत तो वैसे तीन-चार माह पहले ही हो गई थी, लेकिन पिछले दिनों विधानसभा में हुए हंगामे के बाद यह परवान पर चढ़ी।
दरअसल विधानसभा में बीते दिनों मंत्री अविनाश गहलोत ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को लेकर टिप्पणी की। सदन में मौजूद डोटासरा ने इस मुद्दे को पकड़ा और हंगामा मच गया। नतीजतन डोटासरा के साथ छह कांग्रेस विधायकों को निलंबित कर दिया गया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे को लेकर हुए विवाद की वजह से सात दिन तक सदन में विवाद रहा। बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ। समझौते के तहत डोटासरा के बयान पर जूली ने सदन में घटना को लेकर माफी मांग ली। इसके चलते सभी कांग्रेस विधायकों का निलंबन रद्द कर दिया गया।
हालांकि उसी दिन डोटासरा ने एयरपोर्ट पर मीडिया के सामने हाथों-हाथ स्पष्ट कर दिया कि सदन में हुई घटना को लेकर मेरा गतिरोध अभी खत्म नहीं हुआ है। इसके साथ ही जूली और डोटासरा के बीच रिश्तों में आई तल्खी भी सामने आ गई। नतीजन उस दिन से डोटासरा लगातार सदन से दूरी बनाए हुए हैं। पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार जूली के इस माफीनामे से डोटासरा नाराज बताए जा रहे हैं। इस घटना के बाद से कांग्रेस के कुछ विधायकों में भी गुटबाजी पनपना शुरू हो गई है।
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इस मुद्दे को लेकर भाजपा भी कांग्रेस को घेरने में जुटी है। भाजपा इसे डोटासरा और जूली के बीच वर्चस्व की लड़ाई का रूप देने के प्रयास में सक्रिय है। सत्तापक्ष सदन में लगातार यह बोलकर कांग्रेस को घेरने में जुटा है कि डोटासरा सदन में जूली को बोलने नहीं देना चाहते। हालांकि दोनों नेता अब तक परस्पर बयानबाजी से बचते नजर आए हैं। दोनों की पिछले दिनों कांग्रेस नेता के विवाह में मुलाकात भी हुई। इस दौरान दोनों मुस्करा दिए।
डोटासरा की सदन से अनुपस्थिति को लेकर पार्टी के भीतर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ विधायकों का मानना है कि पार्टी की एकजुटता के लिए इन मतभेदों को जल्द सुलझाना जरूरी है। कुछ विधायक तो सदन के गतिरोध को लेकर लिए गए निर्णय की भी समीक्षा कराने में जुटे हैं। सदन में जूली के माफीनामे को कोई सही तो कुछ गलत निर्णय बता रहे हैं।
Q- गतिरोध खत्म होने के बाद भी डोटासरा सदन नहीं आ रहे, क्या समझौते से नाराज है?
जूली: कोई नाराजगी नहीं। हम दोनों चाहते थे सदन चले, क्योंकि भाजपा का रवैया सदन चलाने के पक्ष में नहीं था। जनता के मुद्दे सदन में उठे, इसलिए जनहित में यह निर्णय किया। भाजपा तो संविधान की हत्या करने पर उतारू है।
Q- चर्चा है कि इस समझौते के बाद से आपके और डोटासरा के रिश्तों में कड़वाहट है।
जूली: हमारे रिश्ते में कड़वाहट की कोई जगह नहीं। जब से हम दोनों ने काम शुरू किया है, भाजपा के हौसले पस्त हैं। भाजपा नेता अपनी कमियां छिपाने के लिए यह मामला उठाकर फूट डालो राज करो की नीति पर चल रहे हैं।
Q- सदन में किए समझौते को लेकर आपकी टीकाराम जूली ने नाराजगी है?
डोटासरा : मेरी कोई नाराजगी, गुटबाजी नहीं है। समझौते से पहले मुझसे पूछा गया था। मैंने उन्हें समझौता करने के लिए कहा था। मेरा यही मत था कि सदन चले और इंदिरा गांधी के लिए जो टिप्पणी की कई वह कार्यवाही से हटे।
Q- सत्तापक्ष की ओर से आरोप लगाया गया कि आप नेता प्रतिपक्ष को बोलने नहीं देना चाहते, क्या सही है?
डोटासरा : गलत है। सदन में कौन बोलेगा, यह नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ही तय करते हैं, तो उन्हें मैं कैसे रोक सकता हूं। मैं तो इस सत्र में एक बार बोला हूं, जूली तो रोज बोलते हैं।
Q: निलंबन बहाली के बाद से आप सदन नहीं आ रहे क्या वजह है?
डोटासरा : मीडिया की खबरों को आधार बनाकर जिस प्रकार मेरे खिलाफ सदन में चर्चा कराई गई। मेरे लिए कहा गया कि मैं विधायक बनने लायक नहीं हूं। इससे मेरी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। इसके बारे में अभी कानूनी सलाह ले रहा हूं।
Updated on:
05 Mar 2025 11:01 am
Published on:
05 Mar 2025 08:38 am

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