वसुंधरा को भाजपा का प्रदेशाध्यक्ष नियुक्त किया तब हुआ उनका विरोध, फिर यूं बना भाजपा में समीकरण
जयपुर ।
प्रदेश में अशोक परनामी के अध्यक्ष पद से त्यागपत्र के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की घोषणा में विलंब हो रहा है। पांच दिन बाद भी नए अध्यक्ष को लेकर अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन पार्टी सूत्रों के अनुसार केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत का नाम जिस तरह से सामने आ रहा है उसके हिसाब से शेखावत को नया प्रदेशाध्यक्ष तय माना जा रहा है।
लेकिन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की नाराजगी के चलते घोषणा में विलंब हो रहा है। माना जा रहा है कि शेखावत को संघ का पूरा समर्थन है, लेकिन जाटों की नाराजगी की आशंका के आधार पर उनके नाम का विरोध किया जा रहा है। लेकिन एक समय में जब वसुंधरा को प्रदेशाध्यक्ष नियुक्त किया गया था, तब उनका विरोध हुआ था। लेकिन उस विरोध के बाद भी आज वसुंधरा राजस्थान से भाजपा का सफल चेहरा है।
भाजपा की स्थापना से भैरोसिंह शेखावत राजस्थान में भाजपा का चेहरा रहे। साथ ही शेखावत तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे। एक बार जनता पार्टी तथा दो बार भाजपा की सरकार उनके नेतृत्व में बनी।
उप-राष्ट्रपति निर्वाचित होने के बाद राज्य में केंद्रीय नेतृत्व की ओर से वसुंधरा राजे को राज्य में पैराशूट के रूप में उतारा गया था। उन्हें भाजपा का प्रदेशाध्यक्ष नियुक्त किया गया था, तब उनका विरोध हुआ था। विरोधियों को दरकिनार कर उन्होंने अपनी पकड़ मजबूत की और वर्ष 2003 में उनके नेतृत्व में पहली बाद अपने बूते पर पूर्ण बहुमत से भाजपा ने सरकार बनाई। वर्ष 2013 में भी उनके नेतृत्व में भाजपा प्रचंड बहुमत से राज्य की सत्ता में आई। वर्तमान हालात में वसुंधरा के विकल्प की तलाश उनसे शुरू होकर उन पर ही पूरी होती है।
हर बार विरोधी परास्त
राजस्थान की राजनीति में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे गत दो दशक से सक्रिय है और अपनी इस सक्रियता के दौरान अपना विकल्प किसी को नहीं बनने दिया। इस दौरान केंद्रीय नेतृत्व से कई मर्तबा उनकी अनबन रही और प्रदेश भाजपा में भी कई बार उनकी कार्यशैली को लेकर विरोध हुआ, लेकिन अंततोगत्वा उनके विरोधियों को ही शांत होना पड़ा या फिर अलग राह देखनी पड़ी।
फिर साथ आए विरोधी
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा वसुंधरा राजे से नाराजगी के चलते अलग हो गए थे, लेकिन एक लंबे अर्से बाद भाजपा में आकर वसुंधरा राजे के नेतृत्व को स्वीकार लिया। हालांकि मीणा की भाजपा में वापसी की पृष्ठभूमि में केंद्रीय नेतृत्व की सक्रियता मानी जा रही है, लेकिन उनके आने से भाजपा के वोटों के जातिगत समीरणों को मजबूती मिली है। मीणा की राह पर ही चलकर घनश्याम तिवाड़ी अलग पार्टी बना रहे हैं, लेकिन वे वसुंधरा राजे को प्रदेश की राजनीति से हटाने की शर्त पर ही भाजपा में रहने को राजी है।
राजस्थान प्रदेशाध्यक्ष के लिए ये बोले डूडी
राजस्थान भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष का फैसला केंद्रीय नेतृत्व का करना है। केंद्रीय नेतृत्व जिसे भी प्रदेशाध्यक्ष का दायित्व सौंपता है, हम सभी उनका सहयोग करेंगे। कार्यकर्ताओं के व्यक्ति नहीं, पार्टी अहम है। - रामनारायण डूडी, राज्यसभा सांसद एवं भाजपा नेता