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राजस्थान के इस गांव का नाम क्यों पड़ा झाग, बहुत दिलचस्प है कहानी

राजस्थान की राजधानी जयपुर से 45 किलोमीटर दूरी पर स्थित ग्राम झाग में रोजगार के साधन उपलब्ध नहीं होने से ग्रामीणों को काम धंधे के लिए पलायन करने को मजबूर होना पड़ रहा है।

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जितेंद्र शर्मा/जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर से 45 किलोमीटर दूरी पर स्थित ग्राम झाग में रोजगार के साधन उपलब्ध नहीं होने से ग्रामीणों को काम धंधे के लिए पलायन करने को मजबूर होना पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि करीब 500 वर्ष पुराना झाग गांव का नाम काली माता मंदिर के समीप से गुजर रही बांडी नदी में झाग आने पर पड़ा है। लोगों ने बताया कि जयपुर से झाग गांव तक सरकारी बसों का संचालन नहीं होने से ग्रामीणों को निजी वाहनों में सफर करने को विवश हैं। झाग में पेयजल व विद्युत कटौती की गंभीर समस्या बनने से लोगों को भीषण गर्मी में परेशानी का सामना करना पड़ता है। जानकारी के अनुसार झाग में 7 हजार की आबादी होने के बाद भी सरकार की ओर से सरकारी बस सुविधा संचालित नहीं की जा रही है।

लोगों को निजी वाहनों से ही इधर-उधर आवागमन करना पड़ता है। झाग गांव में कहने को तो पंचायत मुख्यालय भवन, राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, राजकीय महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम बालिका विद्यालय, राजकीय पशु चिकित्सालय, ग्राम सेवा सहकारी समिति, आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रखे हैं। इसके बावजूद भी जयपुर से पंचायत मुख्यालय तक बस संचालन नहीं होने से ग्रामीणों एवं स्थानीय सैकड़ों कार्मिकों को आवागमन करने में परेशानी उठानी पड़ती है। वही ग्राम में 1 दर्जन से अधिक देवालय स्थित है। झाग के मुख्य बस स्टैंड के समीप तेजाजी मंदिर व करीब 25 बीघा भूमि पर सार्वजनिक तालाब बना हुआ है। तालाब के चारों ओर सुरक्षा दीवार नहीं होने से हमेशा हादसों का अंदेशा बना रहता है।

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वही ग्राम में प्रेम पाठशाला एनजीओ की ओर से संचालित है जिसमें निर्धन बच्चों को नि:शुल्क अध्ययन कराया जाता है। प्रेम पाठशाला के छात्रावास व स्कूल में करीब 300 बच्चे अध्यनरत है। झाग में बगरू रोड़ पर बांडी नदी स्थित महाकाली का मंदिर स्थित है। वही तालाब की पाल पर राम दरबार, शिव मंदिर एवं सांवली रोड़ पर रामद्वारा बालाजी मंदिर स्थित है। जहां पर प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु भगवान के दरबार में जाकर प्रभु की महिमा का गुणगान कर सुख समृद्धि की कामना करते हैं। स्थानीय लोगों की पीड़ा है कि ग्राम में स्थानीय पंचायत प्रशासन की ओर से सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं होने से लोगों को मौसमी बीमारियां फैलने का डर बना रहता है। सफाई व्यवस्था के अभाव में जगह जगह कचरे के ढेर जमा हो रखे हैं। वही झाग से महलां व बगरू सड़क मार्ग के किनारे बबूल के पेड़ जमा होने से वाहन चालको को अनहोनी का डर बना रहता है।

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ग्राम में जल जीवन मिशन योजना के तहत बिसलपुर जलापूर्ति नियमित नहीं होने से ग्रामीण महिलाओं को बिना मुंडेर के कुएं से रस्सी के सहारे पानी खींचने को मजबूर है। ग्राम के युवाओं को रोजगार के लिए दूरदराज भटकना पड़ता है। झाग में बांडी नदी स्थित महाकाली मंदिर में हर वर्ष श्री महादेवी जन कल्याण संस्थान के तत्वाधान में चैत्र नवरात्र में तीन दिवसीय धार्मिक मेला का आयोजन छठ से अष्टमी तक आयोजित किया जाता है। जिसमें हजारों श्रद्धालु पहुंचकर महाकाली के दर्शन कर सुख समृद्धि की कामना करते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्राम के विभिन्न मौहल्ले में नाली निर्माण नहीं होने से घरों का गंदा पानी आम रास्तों में फैलने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है।

क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम में रोजगार के साधन उपलब्ध हो तो ग्रामीणों का पलायन रुक सके। झाग के ग्रामीणों का मुख्य व्यवसाय कृषि कार्य एवं पशुपालन है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि सरकार की ओर से गांव में स्थानीय लोगों व महिलाओं को स्वरोजगार के साधन उपलब्ध करवाने के लिए पहल करें। सरपंच बाबूलाल धोबी ने बताया कि झाग गांव में पंचायत मुख्यालय बना होने के बाद भी ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं की दरकार है। झाग पंचायत क्षेत्र में ग्राम झाग, श्रीनिवासपुरा, भगवतसिंहपुरा सहित 11 वार्ड स्थित है। पंचायत क्षेत्र में करीब 4500 वोटर होने के साथ करीब 7000 की आबादी है।

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