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क्राइम होने पर अब बधिर जन क्यू आर कोड से करेंगे पुलिस से संपर्क, जयपुर में नई तकनीक होने जा रही शुरू

दुनियाभर में 23 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस मनाया जाता है।

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क्राइम होने पर अब बधिर जन क्यू आर कोड से करेंगे पुलिस से संपर्क, जयपुर में नई तकनीक होने जा रही शुरू

क्राइम होने पर अब बधिर जन क्यू आर कोड से करेंगे पुलिस से संपर्क, जयपुर में नई तकनीक होने जा रही शुरू

जयपुर। दुनियाभर में 23 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य है लोगों को सांकेतिक भाषा के महत्व के बारे में जागरूक करना। बधिर लोगों के लिए सांकेतिक भाषा काफी मायने रखता है। इसमें उंगलियों या हाथ के इशारों के माध्यम से बातचीत की जाती है।

राजधानी जयपुर में नुपूर संस्था की ओर से बधिर लोगों के लिए काम किया जाता है। बधिर लोगों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि वह अपनी अंगूली व हाथों से इशारे कर अपनी बात को बताते है। ऐसे में उनकी भाषा हर किसी को समझ में नहीं आती है। कई बार बधिर जन क्राइम का शिकार हो जाते है। ऐसे में वह अपनी पीड़ित अपनी बात को सीधे तौर पर क्यूआर कोड से पुलिस तक पहुंचा सकेगा।

ऐसे करेगा क्यूआर कोड काम...

क्यूआर कोड स्कैन पर एक लिंक जनरेट होगा, जैसे ही उस लिंक पर क्लिक करेंगे तो संस्था की ओर से उपलब्ध कराए गए। सांकेतिक भाषा के विशेषज्ञ के पास वीडियो कॉल पहुंच जाएगा। इस वीडियो कॉल के जरिए बधिर व्यक्ति अपनी बात करेगा, उस बात को समझ और रूपांतरण कर इंटरप्रेटर सामने वाले व्यक्ति को समझा सकेगा। इस तकनीक के उपयोग से बधिर जन के साथ आम जन को कई तरह के फायदे मिलेंगे। एक तो इंटरप्रेटर का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। दूसरा इस वीडियों कॉल को रिकॉर्ड भी किया जाएगा। इसके साथ उस जगह की लोकेशन भी आएगी, ताकि अगर किसी तरह की कोई इमरजेंसी है तो शिकायत करने वाले व्यक्ति की लोकेशन पर बिना समय गंवाए मदद पहुंचाई जा सके।

सार्वजनिक स्थानों पर लगेंगे क्यू आर कोड..

संस्था की ओर से अभी सॉफ्टवेयर बनाया गया है। अभी सॉफ्टवेयर का ट्रायल किया जा रहा है। अभी तक क्यू आर कोड को किसी स्थान पर लगाया नहीं लगाया गया है। माना जा रहा है कि 26 सितंबर से क्यू आर कोड लगाने की प्रक्रिया शुरू होगी। जिसके बाद इसका फायदा मूक बधिक लोगों को मिलेगा। क्यूआर कोड को पहले फेज में चुनिंदा पब्लिक प्लेस, स्कूल-कॉलेज, कॉर्पोरेट ऑफिस, बसों और पुलिस थानों में लगाएंगे। इसके बाद डोर टू डोर तक भी इस सुविधा को लेकर जाएंगे। ताकि बधिर जन को अधिक से अधिक सुविधा मिल सके।

आसानी से नहीं मिल पाते इंटरप्रेटर..

नुपूर संस्था के संस्थापक मनोज भारद्वाज ने बताया कि आमतौर पर बधिर व्यक्तियों को बेहद महत्वपूर्ण स्थानों पर कम्युनिकेशन करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लगातार प्रयास के बाद भी राजस्थान में सांकेतिक भाषा को आम जनता तक नहीं पहुंचाया जा सका है, जिसकी वजह से यह दिक्कत खड़ी हो रही है। सरकार के स्तर पर कई बार कोशिश की गई, लेकिन आम जन तक सांकेतिक भाषा की जानकारी नहीं पहुंच पाई। आपातकालीन सेवाओ में आज भी बधिर जन को अपनी समस्याओं को बताने के लिए इंटरप्रेटर की जरूरत पड़ती है, जो आसानी से नहीं मिल पाते हैं।

अब तक पुलिस से ऐसे लेते है मदद ..

अब तक किसी भी बधिर के साथ कोई क्राइम या अन्य परेशानी होती थी तो वह अपने इशारे से एक वीडियो बनाता है और उस वीडियो को व्हाटसएप ग्रुप में डालता है। यह ग्रुप पुलिस और बधिर जन के लिए बना हुआ है। इस ग्रुप में आने वाले वीडियो को देखकर पुलिस इनकी मदद करती है। लेकिन क्यू आर कोड प्रक्रिया शुरू होने के बाद इस ग्रुप की ज्यादा जरूरत नहीं पड़ेगी। फिर पुलिस के लिए भी प्रक्रिया से आसानी होगी।


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