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Video संसद के सेन्ट्रल विस्टा प्रोजेक्ट की तकनीक से बन रहा जयपुर का आईपीडी टावर

छत का हिस्सा ही बनी स्टील की शटरिंग

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जयपुर। सवाई मानिसंह अस्पताल में बन रहे आईपीडी टावर को विधानसभा चुनाव से पहले ज्यादा ‘ऊंचाई’ देने का प्लान है। टावर की कुल ऊंचाई 24 मंजिला है और पहले फेज में 14 मंजिल बनाना तय हुआ था, लेकिन अब इसे 16 मंजिल तक ले जाने का प्लान तैयार किया गया है। टावर का एक फ्लोर (छत निर्माण) 15 दिन की बजाय अब 6 से 7 दिन में तैयार होगी। इसके लिए शटरिंग तकनीक बदली जा रही है।
पारंपरिक शटरिंग की बजाय दिल्ली में सेन्ट्रा विस्टा (नया संसद भवन) में अपनाई गई अत्याधुनिक तकनीक से काम कर रहे हैं। इसमें दो बीम के बीच स्टील चद्दर की शटरिंग लगाकर उसी पर सीमेंट-कंक्रीट बिछा रहे हैं। इसी स्टील की चद्दर को छत का हिस्सा बनाया गया है। यानि, नीचे किसी तरह के सपाेर्ट की जरूरत नहीं है। प्रदेश में स्टील स्ट्रक्चर से बनने वाली पहली सरकारी इमारत में इस तरह का प्रयोग किया गया है। नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल हर दो दिन में हाेमवर्क चैक कर रहे हैं, क्योंकि सरकार का यह महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट है और चुनाव आचार संहिता से पहले फीता काटना है।

यहां भी हो रहा इस तकनीक से काम, दावा सुरक्षित
-नए संसद भवन प्रोजेक्ट सेन्ट्रल विस्टा में काम हुआ
-नोएडा में 21 मंजिला कॉमर्शियल प्रोजेक्ट बना रहे
-गुरुग्राम में सरकारी इमारत में प्रयोग चल रहा

हाइब्रिड मॉडल : 65 प्रतिशत हिस्सा स्टील, वजन 7000 टन
टावर का निर्माण हाइब्रिड मॉडल (स्टील ज्यादा व कंक्रीट कम) पर हो रहा है। टावर का मुख्य हिस्सा (काॅलम व बीम) स्टील स्ट्रक्चर ही होगा। इसमें करीब 7000 टन स्टील उपयोग होगा, जो निर्माण सामग्री का 65 प्रतिशत हिस्सा है। जेडीए ने पिलर, बीम, गर्डर स्ट्रक्चर निर्माण का जिम्मा दो बड़ी स्टील कंपनियों को सौंपा है। स्ट्रक्चर हिस्सा फरीदाबाद में तैयार हो रहा है, यहां केवल नट-बोल्ट से कसने का काम ही करना पड़ रहा है। कंक्रीट की तुलना में प्रोजेक्ट निर्माण 60 फीसदी समय में होने दावा किया गया है।

फिनिशिंग का भी बदला टारगेट : 2 की बजाय 8 फ्लोर
टावर की स्ट्रक्चर भले ही सोलह मंजिल तक ले जा रहे हों, लेकिन मौजूदा स्थिति के अनुसार फिनिशिंग शुरुआती दो मंजित तक हो पाएगी। दोनों मंजिल में मरीजों का रजिस्ट्रेशन काउंटर होगा। हालांकि, मंत्री धारीवाल ने आठ मंजिल तक फिनिशिंग करने का टारगेट दिया है।
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-जनता को प्रोजेक्ट जल्द से जल्द मिले, इसके लिए निर्माण में अत्याधुनिक तकनीक उपयोग कर रहे हैं। यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि दूसरे फेज में ऊपरी मंजिल पर काम चलता रहे और नीचे की मंजिलों का भी उपयोग होता रहे। हर दो दिन में होमवर्क चैक कर रहे हैं, ताकि तय समय पर ज्यादा काम हो सके। इसके लिए तकनीकी टीम और एक्सपर्ट दोनों की संयुक्त विजिट भी कराई जा रही है।
-शांति धारीवाल, नगरीय विकास मंत्री

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