
आरोप लगाने से पहले साक्ष्यों को सामने रखना भी जरूरी है : शरमन
जयपुर. मी टू (#MeToo) कैम्पेन को लेकर 'रंग दे बसंती', 'गोलमाल', '3 इडियट्स', 'हेट स्टोरी 3' फेम एक्टर शरमन जोशी ने बड़ा बयान दिया है। फिल्म 'काशी : इन सर्च ऑफ गंगा' के प्रमोशन के सिलसिले में जयपुर आए शरमन का मानना है कि ऐसे मुद्दे लीगल ग्राउंड पर ही उठाने चाहिए। उनका कहना है कि मैं उन महिलाओं का सम्मान करता हूं, जो अपनी समस्याएं लेकर आई हैं लेकिन किसी पर आरोप लगाने से पहले साक्ष्यों को सामने रखना भी जरूरी है। मैं फिल्म छोडऩे या इस्तीफे लेने का पक्षधर नहीं हूं।
शरमन कहते हैं, 'वैसे मैंने बॉलीवुड में एक भी बंदे को हैरेस होते नहीं देखा, चाहे कहानियां खूब बनी हों लेकिन उनके साक्ष्य नहीं देखे।'
चुनौती से मिलता है रोमांच
शरमन की फैमिली एक्टिंग फील्ड से जुड़ी रही है। उनके परिवार के कई लोगों ने रंगमंच में अहम भूमिका निभाई है। फिल्मों के चयन के बारे में वह कहते हैं, 'मैं हमेशा स्क्रिप्ट पर ध्यान देता हूं। वो ही फिल्में चुनना पसंद करता हूं, जो दर्शकों के दिलों को छू सकें। थिएटर से लेकर फिल्मों में मेरे सब्जेक्ट अलग-अलग होते हैं और उन्हें निभाने के लिए आने वाले चैलेंज रोमांच पैदा करते हैं। इसी वजह से मैंने थिएटर और फिल्मों, दोनों में डिफरेंट तरह के एक्सपेरिमेंट किए हैं।
बनारस के लोगों की आवाज में रिकॉर्ड करवाए अपने डायलॉग
बकौल शरमन, 'काशी' सस्पेंस थ्रिलर है, जिसमें कई तरह के लेयर और कॉम्प्लेक्स किरदार देखने को मिलेंगे। शरमन बताते हैं, 'जब इस फिल्म की कहानी पढ़ रहा था तो क्लाइमैक्स पर आते-आते रुक गया। कयास लगाने लगा कि कहानी किस मोड़ पर जाएगी लेकिन जब कहानी का एंड पढ़ा तो इस फिल्म से पूरी तैयारी के साथ जुडऩे का फैसला लिया। इसके लिए मैंने बनारस के लोगों की आवाज में अपने डायलॉग रिकॉर्ड करवाए। फिर उन्हें सुनकर रिहर्सल करता था। शूट से पांच दिन पहले बनारस पहुंचकर लोगों के हाव-भाव और बातों को सुना।'
Published on:
17 Oct 2018 01:09 am
