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फिर ताज़ा हुए जयपुर बम धमाकों के ‘ज़ख्म’, सदमा झेल चुके लोगों को पटाखे की आवाज से भी होती घबराहट

Jaipur Bomb Blast 13 May 2008: फिर ताज़ा हुए जयपुर बम धमाकों के 'ज़ख्म'

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jaipur bomb blast

जयपुर।

13 मई, 2008 का नाम आते ही पूरे शरीर में कंपकंपी छूटने लगती है। दीपावली पर होने वाली पटाखों की आवाज भी बम जैसी लगती है। जयपुर शहर में हुए बम धमाकों को भले ही दस साल बीत गए हो, लेकिन जिन लोगों ने इस दर्द को झेला है उनके जख्म आज भी हरे हैं। जयपुर में 13 मई के दिन दस साल पहले चारदीवारी में आठ अलग-अलग स्थानों पर हुए बम धमाके हुए थे।

शाम के समय आठ बम धमाकों की गूंज से शहर में दहशत फैल गई थी। धमाके में 70 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और 185 घायल हो गए थे। हैरानी की बात यह है कि पत्रिका टीम ने जब धमाकों वाली जगहों का जायजा लिया तो कही भी पुलिस की व्यवस्था नहीं दिखाई दी।

पतासी वाले को कटवाना पड़ा पैर
जौहरी बाजार स्थित नेशनल हैंडलूम के नीचे पतासी का ठेला लगाने वाले विनोद सिंह शेखावत ने बताया कि 13 मई का नाम आते ही अभी भी पुराना मंजर घूम जाता है। विनोद ने बताया कि उस दिन भी वह लोगों को पतासी खिला रहे थे, शाम का समय था, तभी अचानक एक धमाका हुआ और तेज रोशनी के साथ धुआं धुआं हो गया। वह नीचे गिर गए। जब उन्होंने आस-पास देखा तो दिल दहला देने वाला नजारा दिखाई दिया। पास में दुकान करने वाले लड़के का नीचे का हिस्सा धमाके में उड़ गया था। जबकि उसकी सांसे चल रही थी। कुछ दूर पर ही महिलाओं के शव पड़े हुए थे। किसी तरह उन्होंने खुद को संभाला। तभी आस-पास के लोग आ गए, जब उन्हें होश आया तो पता चला कि अब उन्हें एक ही पैर से काम चलाना पड़ेगा।

किसी ने बुला लिया तो बच गई जान
पतासी के पास ही बरामदे में चूड़ी बेचने वाले मुमताज भाई ने बताया कि अल्लाह का शुक्र है कि उस दिन सामने दुकान वाले ने दो मिनट के लिए बुला लिया गया था, जब वह वापस लौट कर आए तो जो दृश्य उन्होंने देखा वह झकझोरने वाला था। आस-पास लोगों के शव पड़े हुए थे और लोगों की चिल्लाने की आवाज आ रही थी। एक बार तो समझ में नही आया कि हुआ क्या। तभी लोग मदद के लिए दौड़ पड़े। आज भी कई बार जब दृश्य घूम जाता है तो आंखों में आंसू आ जाते है।

फूल देने गया था बच गई जान
सांगानेरी गेट पर फूल बेचने वाले चौगान ने बताया कि उनकी पचास साल से फूलों की दुकान है। 13 मई 2008 को वह फूल की दुकान पर बैठे थे, तभी उन्हें किसी ने आवाज दी, वह उसके पास गए। एक मिनट बाद ही लौटे तो धुआं और चिंगारी निकल रही थी। पहले तो वह समझ नही पाए, जब उन्होंने लोगों को तड़पते हुए देखा तो वह उनकी तरफ भागे। चौगान ने बताया कि आज भी ऐसे लगता है, जैसे कल की बात हो।

---आज भी सहम जाते हैं...
चांदपोल मंदिर के पुजारी मारुति वल्लभ पारीक ने बताया कि 13 मई, 2008 को साइकिल में लगा बम फटा था। जिसकी वजह से कई लोग मारे गए थे। आज भी वह दृश्य याद आता है तो दुख होता है, सहम जाते हैं। वहीं बागड़ा भोजनालय के किशोर शर्मा ने बताया कि जिस समय धमाका हुआ उस समय धुआं और आग की लपटें दिखाई दे रही थी। एक बार तो समझ में नही आया कि हुआ क्या, ऐसा लगा मानों ट्रांसफार्मर फटा हो। फिर चीखने चिल्लाने की आवाज आई तो वह लोगों को संभालने पहुंचे और अस्पताल पहुंचाने में मदद की।