
मुकेश शर्मा/दिनेश डाबी
राजधानी जयपुर की सेंट्रल जेल में कैदियों के पास मनपसंद का सामान पहुंचाने का नया खेल चल रहा है। जेल के बाहर आरएसी की चाकचौबंद सुरक्षा भी इस खेल में मात खा रही है। कैदियों को अच्छी सुविधाएं उपलब्ध कराने और मनपसंद सामान पहुंचाने के एवज में जौहरी बाजार स्थित एक छोटी सी दुकान में यह बड़ा खेल चल रहा है। राजस्थान पत्रिका को इसकी भनक लगी तो इसका स्टींग किया गया। पत्रिका रिपोर्टर और फोटो जर्नलिस्ट ने जेल में बंद एक कैदी के नाम पर दुकान पर बैठे व्यक्ति को 500 रुपए जमा करने के लिए पर्ची दी। उक्त व्यक्ति ने पर्ची ली, लेकिन साथ में कहा कि कम से कम 1000 रुपए जमा करते हैं। पांच सौ रुपए जमा करने बंद कर दिए हैं। पड़ताल करने पर उसने बताया कि अधिकत्तम 5000 रुपए जमा करते हैं। सरेआम दुकान के काउंटर पर एक मोटी डायरी रख रखी थी। उसने बताया कि डायरी में बंदी और उसके पिता का नाम नोट किया जाता है।
एक प्रतिशत दे, जेल सेे आने वाला व्यक्ति ले जाएगा रकम
दुकान पर बैठे व्यक्ति को कहा कि 1000 रुपए जमा कराने पर बंदी तक पहुंचाने की गारंटी क्या होगी? तब उसने बताया कि यह डायरी इसी माह की है। इसमें बंदी के नाम के आगे परिजनों द्वारा जमा कराई गई रकम लिखी जाती है। जेल से एक व्यक्ति आता है, वह रुपए जमा होने वाले प्रत्येक बंदी व उसके पिता का नाम और रकम एक रजिस्टर में नोट करता है। फिर यह रकम एकत्र करने के बदले उन्हें पूरी रकम का एक प्रतिशत हिस्सा दिया जाता है। शेष रकम व्यक्ति जेल केंटिन में पहुंचा देता है। इस रकम में जेल प्रशासन की मिलीभगत से इनकार नहीं किया गया है।
एक माह के 1300 रुपए होते हैं जमा
जेल में एक कैदी के नाम पर परिजन 1300 रुपए जमा करवा सकते हैं। इस रकम से पूरे माह में कैदी केंटिन से घरेलू सामान खरीद सकता है। जबकि रकम खत्म होने पर कैदी के नाम पर अगले माह ही परिजन सीधे जेल नियमानुसार 1300 रुपए ही जमा करवा सकते हैं।
Updated on:
29 Dec 2017 02:52 pm
Published on:
29 Dec 2017 11:13 am
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