
जयपुर कांस्टीट्यूशन क्लब (पत्रिका फोटो)
जयपुर: कांस्टीट्यूशन क्लब में अव्यवस्था और बदइंतजामी का मामला सामने आया है। बुधवार को क्लब परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान क्लब प्रबंधन की अव्यवस्थाएं उस समय खुलकर सामने आई, जब कार्यक्रम के बीच में ही हाई-टी के काउंटर हटवा दिए गए और कई अतिथियों को नाश्ता तक नहीं मिल पाया।
क्लब संचालन कर रही निजी कंपनी थ्रीएस हॉस्पिटैलिटी ने निर्धारित समय का हवाला देते हुए बीच कार्यक्रम में ही नाश्ते के काउंटर हटवा दिए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई मेहमानों के हाथों में प्लेटें थीं, लेकिन उन्हें नाश्ता नहीं मिल पाया।
वहीं, कार्यक्रम समाप्त होने के तुरंत बाद पहुंचे कई अतिथियों को काउंटर पूरी तरह हटे मिले। आयोजन से जुड़े लोग कंपनी प्रबंधन से नाश्ता लगाए रखने का अनुरोध करते रहे, लेकिन कंपनी ने उनकी एक नहीं सुनी और काउंटर हटाकर सामान समेटकर ले गए। जबकि, आयोजनकर्ताओं ने कार्यक्रम के लिए पूरी राशि एडवांस में जमा करा दी थी।
इस घटनाक्रम को लेकर कार्यक्रम में शामिल लोगों में नाराजगी देखी गई। कार्यक्रम फिक्की फ्लो संस्था की ओर से आयोजित किया गया था। खास यह है कि कांस्टीट्यूशन क्लब विधानसभा के अधिकार क्षेत्र में संचालित होता है, जबकि केवल संचालन व्यवस्था निजी कंपनी को सौंपी गई है। ऐसे में कंपनी के इस रवैये से क्लब प्रबंधन, कल्ब से जुड़ी विधायकों की समिति और विधानसभा की साख पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
विधानसभा के पास ही 4948 वर्गमीटर भूखंड पर करीब 80 करोड़ रुपए की लागत से क्लब का निर्माण किया गया है। क्लब में रेस्टोरेन्ट, कॉफी हाउस, स्विमिंग पूल, ऑडिटोरियम, मीटिंग हॉल, कांफ्रेंस हॉल, जिम, सैलून, बैडमिंटन एवं टेनिस कोर्ट सहित अतिथियों के ठहरने के लिए कमरे हैं। इसे संचालन के लिए थ्रीएस हॉस्पिटेलिटी कंपनी को दिया गया है। विधानसभा की तरफ से मॉनिटरिंग और नियमित कार्य के लिए अफसर-कर्मचारियों को भी जिम्मेदारी दी हुई है।
आयोजनकर्ता ने कार्यक्रम लेट खत्म होने और हाई-टी 15-20 मिनट ज्यादा समय तक चलाने का अनुरोध किया था, जिस पर उसी अनुसार व्यवस्था की गई। आज तक ऐसा नहीं हुआ कि किसी मेहमान या आयोजनकर्ता को ऐसी दिक्कत आई हो। कोई गलतफहमी रही होगी।
-मनहर सिंह राठौड़, महाप्रबंधक, संचालनकर्ता कंपनी (कांस्टीट्यूशन क्लब)
ऐसा मामला मेरी जानकारी में नहीं है। लिखित में शिकायत आती है तो सक्षम स्तर पर उसकी जांच करा लेंगे।
-विनोद मिश्रा, प्रिंसिपल रिसर्च ऑफिसर, विधानसभा
Published on:
07 May 2026 09:09 am
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