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Rajasthan News : अब ‘नकली’ सरस घी निकालना होगा असंभव ! क्या जानते हैं इस नई पैकिंग की खासियत?

जयपुर डेयरी ने उपभोक्ताओं के लिए मिलावटखोरों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी 'डिजिटल और फिजिकल' सर्जिकल स्ट्राइक की है। गुलाबी नगरी के बाजार में अब आपको सरस घी एक नए 'सुरक्षा कवच' टेट्रा पैक में मिलेगा।

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saras ghee

राजस्थान की राजधानी में शुद्धता का पर्याय माने जाने वाला 'सरस घी' अब पहले से नए और सुरक्षित अंदाज़ में बाज़ार में उतरने जा रहा है। दरअसल, बाजार में फैल रहे नकली घी के जाल पर शिकंजा कसने के लिए जयपुर डेयरी जल्द ही अपनी पैकिंग तकनीक में क्रांतिकारी बदलाव करने जा रहा है। अब उपभोक्ताओं को 1 लीटर का सरस घी हरे रंग के साथ ही नए कलर के मल्टी-लेयर टेट्रा पैक में भी उपलब्ध होगा। इस नई तकनीक की सबसे बड़ी खासियत ये बताई जा रही है कि इसकी नकल करना या इसे दोबारा पैक (Re-packing) करना नामुमकिन है।

₹25 करोड़ का निवेश, मिलावट पर 'टेक्नोलॉजी' का ताला

जयपुर डेयरी के प्रबंध संचालक मनीष फौजदार ने बताया कि डेयरी प्लांट में घी पैकिंग के लिए 25 करोड़ रुपये की लागत वाली अत्याधुनिक टेट्रा पैक फिलिंग मशीन स्थापित की गई है।

  • नकल नामुमकिन: इतनी महंगी मशीन लगाना किसी छोटे मिलावटखोर या नकली फैक्ट्री के बस की बात नहीं है।
  • विशेष सामग्री: इस पैकिंग में इस्तेमाल होने वाला मल्टी-लेयर मटेरियल बाजार में आम तौर पर उपलब्ध नहीं होता। यह केवल प्रमाणित और उच्च-स्तरीय सप्लायर्स से ही प्राप्त किया जाता है।

नए पैक में 'असली' की पहचान

नई पैकिंग में सरस घी के बाज़ार में आने के बाद उपभोक्ताओं को सरस ब्रांड का घी खरीदते समय कुछ बदलावों पर ध्यान देना होगा-

  • नया रंग: सरस की ओर से जल्द लॉन्च होने वाली नई मल्टी-लेयर टेट्रा पैक का कलर केसरिया और भूरे रंग का चमकदार मिक्स जैसा है। कलर में राजस्थान के 'बंधेज प्रिंट' की भी झलक दिखाई देती है। बाज़ार में फिलहाल सरस घी का एक लीटर का हरा पैक भी बाज़ार में उपलब्ध रहेगा।
  • मल्टी-लेयर सुरक्षा: नई लॉन्च होने जा रही पैकिंग पूरी तरह से एयर-टाइट और छेड़छाड़-रोधी (Tamper-proof) है। एक बार पैक खुलने के बाद इसे दोबारा वैसा ही बंद नहीं किया जा सकता।
  • मशीन की क्षमता: वर्तमान में नई मशीन प्रतिदिन 90 हजार लीटर घी पैक करने की क्षमता रखती है।

स्वास्थ्य के लिए 'सुरक्षा चक्र'

जयपुर डेयरी अध्यक्ष ओम प्रकाश पूनिया ने इस बदलाव को उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए एक सुरक्षा चक्र बताया है। उन्होंने कहा कि अक्सर सरस के डिब्बों को कलेवर को कॉपी कर नकली घी बेचा जा रहा है। लेकिन अब ये नई टेट्रा पैक तकनीक डुप्लीकेशन और री-पैकिंग पर प्रभावी रोक लगाएगी। ये न केवल स्वच्छ है, बल्कि परिवहन के दौरान घी के रिसाव (Leakage) को भी पूरी तरह खत्म कर देगा।

130 करोड़ का मास्टर प्लान

यह नई मशीन जयपुर डेयरी के उस बड़े विजन का हिस्सा है, जिसके तहत ₹130 करोड़ की लागत से 50 साल पुराने प्लांट का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। मनीष फौजदार के अनुसार, डेयरी अब पूरी तरह ऑटोमेशन की ओर बढ़ रही है, जिससे मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और दूध-घी की शुद्धता 100% सुनिश्चित की जा सकेगी।

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