
जयपुर में पटाखा फैक्ट्री अग्निकांड - Patrika PICS
Jaipur Factory Fire: जयपुर का खो नागोरियान इलाका मंगलवार को एक ऐसी दर्दनाक मानवीय त्रासदी का गवाह बना, जिसने हर देखने और सुनने वाले शख्स की रूह को कंपा कर रख दिया। एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में दोपहर के समय अचानक भड़की आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और वहां दैनिक मजदूरी कर अपने परिवारों का पेट पालने वाले 7 श्रमिकों को अपनी आगोश में ले लिया।
हादसे के बाद जैसे-जैसे मलबे को हटाया गया, वैसे-वैसे मौतों का यह आंकड़ा बढ़ता चला गया, जिससे पूरे क्षेत्र में मातम पसर गया है। प्रारंभिक राहत कार्यों के बाद सिविल डिफेंस और दमकल विभाग की टीमों ने जब फैक्ट्री के आंतरिक हिस्सों में सर्च ऑपरेशन चलाया, तो वहां का दृश्य बेहद विचलित करने वाला था। बारूद के डिब्बों और लोहे के पतरे के बीच कई जिंदगियां हमेशा के लिए खामोश हो चुकी थीं। वहीं जो मजदूर किसी तरह लपटों के बीच से भागने में कामयाब रहे, वे भी आग की भीषण तपन के कारण बुरी तरह झुलस चुके हैं।
हादसे के तुरंत बाद खो नागोरियान क्षेत्र चीखों से गूंज उठा। आसमान में उड़ता हुआ काला धुआं और रह-रहकर हो रहे पटाखों के छोटे-छोटे धमाके बचाव कार्य में लगे लोगों को भी पीछे हटने पर मजबूर कर रहे थे। फैक्ट्री की इमारत का एक हिस्सा पूरी तरह ढह चुका था, जिसके नीचे कई श्रमिकों के दबे होने की आशंका थी। बचाव टीम ने अपनी जान की परवाह न करते हुए मलबे को हाथों से हटाना शुरू किया।
घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मंजर इतना खौफनाक था कि आग पर काबू पाने के बाद जब शवों को बाहर निकाला गया, तो परिजनों की चीख-पुकार से पूरा इलाका दहल उठा। एक बूढ़े पिता अपनी संतान के जले हुए कपड़ों को पहचानकर जमीन पर गिर पड़े, तो वहीं कई महिलाएं अपने पतियों और बेटों की कुशलता की प्रार्थना करते हुए बदहवास हालत में पुलिसकर्मियों के आगे गुहार लगाती नजर आईं।
इस दर्दनाक हादसे में जो श्रमिक गंभीर रूप से झुलस गए हैं, उन्हें तुरंत पुलिस की पीसीआर (PCR) और स्थानीय एम्बुलेंस की मदद से जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में पहुंचाया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, अस्पताल लाए गए मरीजों में से कुछ की हालत अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है, क्योंकि उनका शरीर 70 से 80 प्रतिशत तक झुलस चुका है और धुएं के कारण उनके फेफड़ों में भी गंभीर संक्रमण फैल गया है।
एसएमएस अस्पताल के अधीक्षक ने बताया कि बर्न और प्लास्टिक सर्जरी विभाग के वरिष्ठ डॉक्टरों की एक विशेष टीम को इन मरीजों की चौबीस घंटे निगरानी के लिए तैनात किया गया है। आईसीयू (ICU) के बाहर बैठे घायलों के परिजन अत्यंत डरे हुए हैं।
इस पूरी घटना का सबसे मार्मिक और दुखद पहलू यह है कि इस पटाखा इकाई में काम करने वाले अधिकांश लोग बेहद गरीब पृष्ठभूमि से आते थे। दैनिक मजदूरी के चंद रुपयों से अपने घर का चूल्हा जलाने वाले ये श्रमिक रोज की तरह सुबह 9 बजे हंसते-खेलते अपने घरों से काम के लिए निकले थे। उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिस बारूद को वे त्योहारों पर दूसरों की खुशियों के लिए डिब्बों में पैक कर रहे हैं, वही एक दिन उनकी मौत का सबब बन जाएगा।
खो नागोरियान के इस हादसे ने एक बार फिर जयपुर नगर निगम, जिला प्रशासन और अग्निशमन विभाग की कार्यप्रणाली को पूरी तरह से कटघरे में खड़ा कर दिया है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि रिहायशी इलाकों के बीचों-बीच बिना किसी पुख्ता फायर एनओसी (NOC) और सुरक्षा उपकरणों के यह पटाखा फैक्ट्री लंबे समय से संचालित की जा रही थी, लेकिन प्रशासन ने कभी समय रहते इस पर कड़ा संज्ञान नहीं लिया।
यदि दफ्तरों में बैठे जिम्मेदार अधिकारी समय-समय पर इन अवैध और असुरक्षित व्यावसायिक इकाइयों का औचक निरीक्षण करते, तो शायद 7 मासूम जिंदगियां असमय काल के गाल में समाने से बच जातीं। पुलिस ने फिलहाल फैक्ट्री मालिक और प्रबंधकों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या और विस्फोटक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन इस कानूनी कागजी कार्रवाई से उन उजड़े हुए परिवारों के आंसू कभी नहीं पोंछे जा सकते।
Updated on:
09 Jun 2026 05:11 pm
Published on:
09 Jun 2026 03:55 pm
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