
जयपुर के ट्रांसपोर्ट नगर का दृश्य। फोटो पत्रिका
LPG Crisis : जयपुर शहर में गहराता एलपीजी गैस संकट अब आम जनजीवन पर भारी पड़ रहा है। रसोई से लेकर सड़कों तक इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। खासकर एलपीजी से चलने वाले ऑटो रिक्शा ठप होने के कगार पर हैं, जिससे सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था चरमरा गई है और लोगों को महंगे विकल्पों का सहारा लेना पड़ रहा है।
एलपीजी से संचालित ऑटो रिक्शा चालकों को गैस नहीं मिलने के कारण घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है। इसके बाद भी उन्हें सीमित मात्रा में ही गैस मिल रही है। अजमेर रोड, झालाना, ट्रांसपोर्ट नगर सहित कई प्रमुख पेट्रोल पम्पों पर गैस वितरण या तो पूरी तरह बंद है या सीमित कर दिया गया है।
पेट्रोल पम्पों पर लगे बोर्डों में स्पष्ट लिखा है कि ऑटो चालकों को अधिकतम 250 रुपए और कार चालकों को 550 रुपए तक ही एलपीजी दी जाएगी। इस व्यवस्था के कारण ऑटो चालकों को पांच से छह घंटे इंतजार के बाद भी मात्र 250 रुपए की गैस मिल पा रही है।
ऑटो चालकों का कहना है कि इतनी कम गैस में पूरे दिन ऑटो चलाना संभव नहीं है, जिससे उनकी आय पर सीधा असर पड़ रहा है। कई चालकों ने बताया कि गैस के इंतजार में आधा दिन निकल जाता है, जिससे सवारियां भी नहीं मिल पातीं और रोजगार का संकट गहराता जा रहा है। शहर में सैकड़ों ऑटो संचालकों ने काम बंद कर दिया है।
दूसरी ओर, ऑटो की संख्या कम होने से आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है। ऑफिस और स्कूल जाने वाले लोग अब कैब का सहारा ले रहे हैं, जिससे उनका दैनिक खर्च बढ़ गया है। यात्रियों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें अधिक किराया देकर सफर करना पड़ रहा है। पहले जहां ऑफिस आने-जाने में करीब छह हजार रुपए मासिक खर्च होते थे, अब यह बढ़कर दस हजार रुपए तक पहुंच गया है।
सुबह चार बजे उठकर लाइन में लगना पड़ता है। तब जाकर 250 रुपए की गैस मिलती है। इससे दोपहर तक ही ऑटो चला पाता हूं। ऐसे में रोजी-रोटी पर संकट आ गया है।
रमेश सिंह, ऑटो संचालक
मैंने ऑफिस आने-जाने के लिए ऑटो तय कर रखा है। मैं छह हजार रुपए महीना देती हूं, लेकिन पिछले पांच दिन से ऑटो नहीं आ रहा है। अब मुझे ज्यादा किराया देकर कैब करनी पड़ रही है।
अंजलि शर्मा, आइटी कंपनी कर्मचारी
Published on:
24 Mar 2026 07:15 am
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