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मेट्रो प्रशासन की अनदेखी…ठेकेदारों की मनमानी, सफर के लगते 22, पार्किंग के वसूल रहे 60 रुपए

जयपुर मेट्रो के पार्किंग स्थलों में मनमानी की वसूली हो रही है। यहां यह स्थिति है कि कार खड़ी करने के 60 रुपए दो और उसके बाद ही मेट्रो में सफर करो। जबकि मेट्रो का अधिकतम किराया ही 22 रुपए है।

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अश्विनी भदौरिया

जयपुर। जयपुर मेट्रो के पार्किंग स्थलों में मनमानी की वसूली हो रही है। कोई निर्धारित दर से दो गुना तो कोई तीन गुना राशि वसूल रहा है। इस अवैध वसूली को रोकने के लिए मेट्रो प्रशासन फेल है। रविवार को पत्रिका ने रेट लिस्ट की पड़ताल की तो चौंकाने वाली स्थिति सामने आई।

मेट्रो ने कार के पहले आठ घंटे के लिए 15 रुपए निर्धारित कर रखे हैं, लेकिन 20 से 60 रुपए तक मांगे जा रहे हैं। महीने भर गाड़ी खड़ी करनी हो तो निर्धारित राशि से तीन गुना पैसे पार्किंग स्थलों पर मांगे गए। यहां यह स्थिति है कि कार खड़ी करने के 60 रुपए दो और उसके बाद ही मेट्रो में सफर करो। जबकि मेट्रो का अधिकतम किराया ही 22 रुपए है।

1- सुबह 11:45 बजे : राम नगर मेट्रो स्टेशन की पार्किंग में ठेकेदार से गाड़ी खड़ी करने के लिए पूछा तो बोले मंथली गाड़ी खड़ी करने के 500 रुपए लेंगे। वैसे 20 रुपए लगेंगे।

2-दोपहर 1.30 बजे : सिविल लाइन्स मेट्रो स्टेशन पर चार पहिया गाड़ी के पूरे माह खड़ी करने की एवज में एक हजार रुपए मांगे।

3-दोपहर 2.15 बजे : रेलवे स्टेशन पर एक महीने गाड़ी खड़ी करने की एवज में 1800 रुपए मांगे। उसी हिसाब से प्रतिदिन गाड़ी खड़ी करने के 60 रुपए मांगे।

स्टेशन - किराया
0 से 2 - 6 रुपए
3 से 5 - 12 रुपए
6 से 8 - 18 रुपए
9 से 10 - 22 रुपए

मेट्रो ट्रेन की रेट लिस्ट देखें तो पता चलता है कि किराए से महंगा तो गाड़ी खड़ा करना है। मेट्रो की दर पर ठेकेदार कम करें तब जरूर जनता को राहत मिल सकती है।

वाहन—8 घंटे—24 घंटे—मासिक पास
बस—150—450—4500
कार—15—60—450
ई रिक्शा और ऑटो—15—60—450

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रेलवे जंक्शन, जीआरपी थाने के सामने ही अवैध वसूली हो रही है। नो पार्किंग में गाड़ी लगवाई। लौटकर आए तो 20 रुपए मांगे। पर्ची मांगी तो वहां तैनात होमगार्ड और मेट्रो गार्ड ने कहा कि नो पार्किंग की बनवा दें। रसीद नहीं है। चाय-पानी के तो लेंगे और गाड़ी की सुरक्षा रखेंगे। अब माथाफोड़ी मत करो। सब जुबान का खेल होता है। अब कभी गाड़ी खड़ी मत करना नहीं तो गाड़ी सीधे थाने में जाएगी।

बड़ा सवाल यह है कि जब मेट्रो स्टेशन की पार्किंग पर पहला अधिकार यात्रियों का है और यात्रियों की सुविधा के लिए ही पार्किंग बनाई गई हैं, फिर ये मंथली पास की व्यवस्था क्यों की गई? खासकर बसों और ई-रिक्शा के मंथली पास की व्यवस्था समझ से परे है। कई जगह तो मेट्रो की पार्किंग में बसें ही खड़ी रहती हैं। दिल्ली मेट्रो में सफर करने वाले लोग कार और बाइक के मंथली पास इसलिए बनवाते हैं कि घर से वे मेट्रो की पार्किंग तक अपने वाहन से आते हैं। गाड़ी खड़ी कर मेट्रो ट्रेन से सफर करते हैं। मंथली पास सस्ता होता है। ऐसी स्थिति अभी जयुपर में नहीं है। क्योंकि जयपुर में मेट्रो का दायरा सीमित है।

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