
अविनाश बाकोलिया
जयुपर। ये हैं नगर निगम की फायरमैन विमला जग्रवाल। पिछले साल दक्षिण कोरिया में 64 देशों के बीच हुई प्रतियोगिता में तो जीतकर स्वर्ण सहित कई मैडल ले आईं लेकिन अपने ही दफ्तर के अफसरों और सरकार से हार गईं। उन्हें पदोन्नति और प्रोत्साहन राशि देने का वादा किया गया लेकिन 7 महीने बाद भी कुछ नहीं मिला। अफसरों-दफ्तरों के चक्कर काटकर परेशान विमला का अब आगे का अभ्यास ही छूट गया है।
यों बढ़ाया मान:
पिछले साल 10 से 17 सितंबर तक दक्षिण कोरिया में हुई 'तेरहवीं वर्ल्ड फायर फाइटर्स गेम्स चूंग्जू' प्रतियोगिता में 64 देशों से 6757 फायर फाइटर्स शामिल हुए थे। कुल 45 मैडल्स के साथ भारत सातवें स्थान पर रहा। इनमें 6 मैडल तो अकेले विमला ने जीते। वह 2 स्वर्ण सहित 6 मैडल पाने वाली प्रथम भारतीय महिला फायरमैन बनीं। उन्होंने एथलेटिक में 2 स्वर्ण, स्वीमिंग, आर्म रेसलिंग और ट्रेजर हंट में रजत और आर्म रेसलिंग में कांस्य पदक हासिल किए।
ये हैं प्रावधान :
राजस्थान सरकार की खेल नीति- 2013 के तहत देश से बाहर अन्तरराष्ट्रीय खेल में प्रथम स्थान पाने पर 5 लाख रुपए अनुदान एवं अन्य सुविधाएं देने का प्रावधान है। फायर सेवा या अन्य सेवाओं-विभागों में कार्यरत रहकर मैडल पाने पर अधिकारी पद पर पदोन्नति दी जाती है।
सरकार ने यों किया हतोत्साहित:
नगर निगम में पिछले साल 31 अक्टूबर को अग्निशमन समिति के तत्कालीन चेयरमैन मुकेश लख्यानी की अध्यक्षता में हुई कार्यकारिणी समिति की बैठक में विमला की पदोन्नति का प्रस्ताव सरकार को भेजने का फैसला किया गया। इसके बाद 14 दिसंबर को विमला ने कार्मिक उपायुक्त को पत्र भेजा लेकिन सुनवाई नहीं हुई। विमला ने बताया कि नगर निगम ने सिर्फ दक्षिण कोरिया आने-जाने की खर्च राशि देकर इतिश्री कर ली। स्पोट्र्स किट मांगा तो नियम गिना दिए। निगम से फायरमैन की वरिष्ठता सूची मांगकर डीएलबी काम अटकाए हुए है।
देश के लिए मैडल लाई तब तो नगर निगम के अधिकारियों ने खूब वाहवाही लूटी। पीठ भी थपथपाई लेकिन प्रोत्साहन राशि व पदोन्नति देने में किसी ने रुचि नहीं दिखाई। सात महीने बाद भी प्रशस्ति या बधाई पत्र तक नहीं मिला। प्रोत्साहन देने की बजाय हतोत्साहित किया जा रहा है। विधिक राय सकारात्मक आने के बावजूद पदोन्नति और प्रोत्साहन राशि की फाइल अटकी हुई है।
विमला, फायरमैन, नगर निगम
पदोन्नति की फाइल डीएलबी को भेजी है। वहां से आदेश होने के बाद पदोन्नति दे दी जाएगी।
विजयपाल सिंह, आयुक्त, नगर निगम
Updated on:
14 Apr 2019 08:36 am
Published on:
14 Apr 2019 08:22 am
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