
सांभरलेक (जयपुर)। सांभर की अराध्य देवी मां शाकम्भरी का मंदिर सांभर झील के मध्य एक पहाड़ी पर स्थित है। नवरात्र में यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा अर्चना कर माता से मन्नत मांगते हैं। यह देवी चौहानों की कुल देवी मानी जाती है।
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किवदंती है कि चौहान शासक ने माता की तपस्या की और जब माता प्रकट हुई तो उन्होंने उससे वरदान के लिए कहा तो गोगराज ने कहा कि उसके राज्य में चारों ओर चांदी ही चांदी हो जाए, इस पर माता ने कहा कि ऐसा ही होगा और तू अपना घोड़ा लेकर जहां तक जाएगा वहां चांदी ही चांदी हो जाएगी और मैं तेरे पीछे ही चलूंगी जिस स्थान पर भी पीछे मुड़ कर देख लिया मैं वहां रुक जाऊंगी।
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राजा घोड़ा लेकर चला और काफी दूर चलने के बाद उसके मन में आया कि मेरे राज्य में चांदी हो रही है या नहीं जैसे ही पीछे मुड़कर देखा तो चारों ओर चांदी थी, लेकिन माता वहीं रुक गई और वहां पर माता का मंदिर बनाया गया। इसके बाद जब राजा अपने महल में आया तो उसकी मां ने कहा कि तूने यह क्या किया अब तो कई राजा इस चांदी के लालच में राज्य पर आक्रमण करेंगें, इस पर राजा फिर माता के पास गया और कहा कि माता इस चांदी को आप कच्ची चांदी यानी नमक में बदल दो जिससे मेरे राज्य पर आक्रमण ना हो और यहां के लोग इसका व्यापार कर जीवन यापन कर सके। कहा जाता है तभी से चांदी नमक में बदल गई।
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Published on:
22 Sept 2017 07:46 pm
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