
डिस्चार्ज होने से पहले फोटो खिंचवाने के लिए ट्रॉली पर मरीज (पत्रिका फोटो)
जयपुर: राज्य सरकार भले ही सरकारी योजनाओं के तहत नौकरी करने वालों को लाखों रुपए तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराने का दावा कर रही हो। लेकिन प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एसएमएस में नौकरी करने वालों को इलाज से पहले और बाद में कागजी जंग लड़नी पड़ रही है। हालात ऐसे हैं कि नौकरी करने वालों और उनके मरीजों को घंटों काउंटरों पर कतार में खड़ा रहना पड़ता है और कई बार एक प्रक्रिया पूरी करने के लिए अलग-अलग जगह चक्कर लगाने पड़ते हैं।
बता दें कि सबसे ज्यादा परेशानी गंभीर मजदूरी और दूरदराज से आने वाले लोगों को झेलनी पड़ रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह अस्पताल में अब तक बेड साइड रजिस्ट्रेशन और रेन व्यवस्था लागू न होना है।
इलाज पूरा होने के बाद डॉक्टर छुट्टी की सलाह दे देते हैं। फिर रिकवरी प्रक्रिया शुरू होती है। फाइलें कई घंटे बाद काउंटर तक पहुंचती हैं। वहां नंबर आने के बाद मरीज को फोटो खिंचवाने के लिए बुलाया जाता है। लंबी कतारें और तकनीकी शोषण के कारण योजना क्लीयरेंस, फाइल प्रक्रिया में कई बार रात हो जाती है तो कई बार अगले दिन डिस्चार्ज दिया जा रहा है।
मरीज घंटों मशक्कत के बाद ही ओपीडी या इमरजेंसी से भर्ती हो सीखते हैं। वार्ड में पहुंचने के बाद भी परेशानी खत्म नहीं होती। मरीजों को सरकार की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के तहत बीमारी का कोड और टीआईडी नंबर जारी करवाने के लिए 'मां योजना' जिसमें अन्य काउंटरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में कई बार पूरा दिन निकल जाता है। यदि किसी दस्तावेज या तकनीकी प्रक्रिया में कमी आ जाए तो मरीजों को कलेक्टर कार्यालय तक जाना पड़ता है।
पड़ताल में यह भी सामने आया कि अस्पताल के ज्यादातर वार्डों में लाभार्थियों इंटरनेट सुविधा उपलब्ध है और इसके लिए अलग से सिस्टम भी लगाया गया है। इसके बावजूद अब तक बेड साइड रजिस्ट्रेशन और रजिस्ट्रेशन व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी।
वार्ड में ही फोटो खींच लेतेः करौली निवासी मरीज बलवीर ने बताया कि उनके पांव का ऑपरेशन हुआ था। वे सुबह 10 बजे से भर्ती थे। छुट्टी के लिए सुबह से परेशान हो रहे हैं। करीब दो घंटे तक स्ट्रेचर पर छुट्टी का इंतजार करते रहे, जिसके बाद उनका नंबर आया। उन्होंने कहा कि इससे अच्छा था कि वार्ड में ही फोटो खींच लें।
कैंसर मरीज बोला, पांव में सूजन हो गईः मरीज बाबूलाल ने बताया कि वे कैंसर से पीड़ित हैं। उन्हें इंजेक्शन लगना है, जिसके लिए भर्ती होना जरूरी है। लेकिन सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक भर्ती नहीं हो सके। लगातार चक्कर आने के कारण उनके पांव में सूजन आ गई।
ढाई घंटे से छुट्टी का इंतजारः ट्रांसपोर्ट नगर निवासी मरीज फरीदा ने बताया कि भर्ती होने के लिए उन्हें सुबह से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अप्रूवल के लिए लगातार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। योजना का लाभ लेने के लिए संबंधित प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है। यदि मरीजों को काउंटर पर किसी प्रकार की परेशानी हो रही है तो उसकी जांच करवाते हैं।
-डॉ. मृणाल जोशी, अधीक्षक
Updated on:
15 May 2026 09:09 am
Published on:
15 May 2026 09:09 am
