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Robotic Surgery: जयपुर के SMS अस्पताल में कमाल, रोबोटिक सर्जरी की मदद से 110 किलो के मरीज की बचाई जान

जयपुर के एसएमएस अस्पताल में रोबोटिक तकनीक से 110 किलो वजन वाले मरीज की जटिल सर्जरी सफल रही। मरीज 'डायाफ्रामेटिक इवेंट्रेशन' के कारण सांस की तकलीफ से परेशान था। अधिक वजन के कारण सामान्य ऑपरेशन मुश्किल था, इसलिए रोबोटिक तकनीक की मदद से सफल ऑपरेशन कर मरीज को नई जिंदगी दी।

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jaipur sms hospital robotic surgery successful

सफल ऑपरेशन के बाद चिकित्साकर्मी। फोटो: पत्रिका

राजस्थान के सबसे बड़े सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल के डॉक्टरों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के अनुभवी डॉक्टरों की टीम ने रोबोटिक तकनीक की मदद से एक 57 वर्षीय मरीज का बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न किया है।

क्या थी मरीज की समस्या?

जयपुर के रहने वाले 57 वर्षीय मरीज, जो स्वयं एक नर्सिंग सुपरिटेंडेंट हैं, पिछले तीन महीनों से सांस लेने की गंभीर समस्या से जूझ रहे थे। उन्हें लगातार खांसी रहती थी और थोड़ा सा चलने पर ही सांस फूलने लगती थी।

जब उन्होंने एसएमएस अस्पताल के सर्जरी विभाग में प्रोफेसर डॉ. अमित गोयल से संपर्क किया, तो जांच में सामने आया कि उन्हें 'डायाफ्रामेटिक इवेंट्रेशन' (Diaphragmatic Eventration) नाम की बीमारी है। इस स्थिति में डायाफ्राम कमजोर होकर ऊपर की ओर खिसक जाता है, जिससे फेफड़ों पर दबाव पड़ता है।

रोबोटिक सर्जरी ही क्यों चुनी गई?

इस केस में सबसे बड़ी चुनौती मरीज का वजन था। मरीज का वजन 110 किलोग्राम होने के कारण पारंपरिक 'ओपन सर्जरी' या सामान्य 'लेप्रोस्कोपिक तकनीक' से ऑपरेशन करना बहुत जोखिम भरा था। ऐसे में यूनिट प्रभारी डॉ. प्रभा ओम के मार्गदर्शन में डॉ. अमित गोयल ने रोबोटिक सर्जरी करने का निर्णय लिया।

रोबोटिक तकनीक का फायदा यह हुआ कि ऑपरेशन के दौरान बहुत कम खून बहा और चीरे भी छोटे लगे। सर्जरी के बाद मरीज को दर्द कम हुआ और वे बहुत जल्दी रिकवर हो गए।

इस ऑपरेशन में डॉ. अमित गोयल, डॉ. प्रवीण जोशी, रेजिडेंट डॉ. गानवी, डॉ. रजत, डॉ. कविता, डॉ. गरिमा, डॉ. जय एवं डॉ. सिद्धार्थ का सहयोग रहा। एनेस्थीसिया विभाग से प्रोफेसर डॉ. सुशील भाटी, डॉ. इंदु वर्मा एवं डॉ. सुनील चौहान ने सहयोग दिया। नर्सिंग स्टाफ में सुनील सहित अन्य कर्मियों का विशेष योगदान रहा।