
पत्रिका फाइल फोटो
जयपुर। झोटवाड़ा स्थित 'मेरी पहल' एनजीओ में 18 लोगों को बंधक बनाकर रखने के मामले में अब सरकारी सिस्टम की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल, दो सप्ताह पूर्व राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और जयपुर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में इन बंधकों को आजाद कराया गया था। पत्रिका की पड़ताल में सामने आया है कि जिस आश्रम में यह अमानवीय कृत्य चल रहा था, उसे सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से पिछले करीब 3 साल से मोटा अनुदान दिया जा रहा था।
जानकारी के अनुसार विभाग की ओर से आश्रम को किराए के नाम पर हर माह करीब 90 हजार रुपए दिए जा रहे थे, वहीं वहां रखे गए प्रत्येक व्यक्ति के लिए ढाई से 3 हजार रुपए प्रतिमाह की दर से राशि स्वीकृत थी। इसके बावजूद आश्रम में रह रहे लोगों सम्मानजनक जीवन और आजादी के बजाए यातनाओं का सामना करना पड़ रहा था।
चौंकाने वाली बात यह है कि बंधक बनाए गए कई लोग पिछले दो से तीन वर्षों से उसी आश्रम में जबरन रह रहे थे। जिनमें प्रेम विवाह करने वाली युवतियां भी शामिल थीं। ऐसे में सवाल उठता है कि इतने लंबे समय में विभागीय अधिकारियों ने कभी मौके पर जाकर निरीक्षण और वहां रह रहे लोगों से संवाद क्यों नहीं किया। वहां जबरन बिना मेहनताने वाली मजदूरी, सवाल करने पर दी जाने वाली सजा और वित्तीय अनियमितताओं के मामले लंबे समय से चल रहे थे। इसके बावजूद विभागीय रिकॉर्ड में सब कुछ ठीक-ठाक बताते हुए आश्रम को नियमित सहायता मिलती रही। इससे विभाग की मॉनिटरिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामले में जांच का विषय है कि अनुदान जारी करने से पहले आश्रम की कार्यप्रणाली, रहन-सहन और मानवाधिकारों की स्थिति की जांच क्या सिर्फ कागजों में ही होती थी। जिसके आधार पर जिम्मेदार हर माह लाखों रुपए की राशि जारी करते रहे। जानकारी के मुताबिक विभागीय अधिकारी उक्त संस्था को दो से चार लाख रुपए तक प्रतिमाह जारी करते थे। एक बार में तीन-तीन माह का पैसा सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग के जिला अधिकारी कार्यालय से पास होता था। इस दौरान निरीक्षण करने वाले अधिकारी कागजों में लिखते थे कि यहां सब बढ़िया है। हालांकि मामला उजागर होने के बाद संस्था का पिछले कुछ महीनों का पैमेंट रोक दिया गया है।
मामले में खुलासा हुआ कि परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर लव मैरिज करने वाली युवतियों को भी भिखारी बताकर संस्था में जबरन बंधक बनाकर रखा गया था। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और जयपुर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में जब बंधकों को संस्था से छुड़ाने पर पूरे घटनाक्रम का खुलासा हुआ।
पत्रिका ने इस मामले में सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग के जिला अधिकारी बी. पी. चंदेल से बात की तो उन्होंने कहा कि इस मामले में बाद में बात करेंगे।
Published on:
02 Jan 2026 07:46 am
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
