
Jaipur Traffic Mobile Court
जयपुर की सड़कों पर लापरवाही से वाहन चलाने और यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले चालकों के खिलाफ अब न्यायिक तंत्र ने सीधे सड़क पर उतरकर मोर्चा संभाल लिया है। जयपुर मेट्रो-II प्रशासन की ओर से शहर की लाइफलाइन माने जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों और व्यस्ततम चौराहों पर सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए एक प्रभावी और अनोखा अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत जयपुर की सड़कों पर विशेष 'मोबाइल कोर्ट' यानी चलती-फिरती अदालत को सक्रिय किया गया है, जो नियमों का उल्लंघन करने वालों का मौके पर ही चालान काट रही है और गंभीर मामलों में वाहनों को तुरंत जब्त करने की सख्त कार्रवाई अमल में ला रही है।
हाल ही में जयपुर-दिल्ली हाईवे स्थित सड़वा मोड़ क्षेत्र में इस मोबाइल कोर्ट द्वारा चलाए गए औचक चेकिंग अभियान से वाहन चालकों में हड़कंप मच गया। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना और आम जनता के भीतर ट्रैफिक नियमों के प्रति अनुशासन पैदा करना है। सरकार और न्यायपालिका के इस सख्त रुख से साफ है कि अब सड़कों पर किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह पूरी कार्रवाई जयपुर मेट्रो-II के मोबाइल मजिस्ट्रेट एवं अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-13 विजय कुमार सिरोहीवाल के सुपरविजन और निर्देशन में संचालित की गई। दिल्ली रोड के सड़वा मोड़ जैसे व्यस्ततम पॉइंट पर नाकाबंदी कर विशेष यातायात जांच अभियान चलाया गया।
आमतौर पर पुलिस चालान काटकर कोर्ट का नोटिस थमा देती है, लेकिन इस अभियान की सबसे खास बात यह रही कि खुद मजिस्ट्रेट और उनकी न्यायिक टीम मौके पर एक विशेष वाहन में मौजूद रही, जिससे ऑन-स्पॉट मामलों की सुनवाई कर तुरंत फैसले सुनाए गए।
अभियोजन अधिकारी दिनेश लोहिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस अभियान के दौरान टू-व्हीलर, कार, कमर्शियल ट्रक, ट्रैक्टर, बस और टैक्सियों सहित सभी श्रेणियों के वाहनों की बहुत ही गहनता से जांच की गई। इस दौरान कुल 35 वाहन चालकों को मोटर वाहन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया गया। इनमें से 11 मामलों का वाहन चालकों द्वारा मौके पर ही अपना अपराध स्वीकार कर लेने के बाद तुरंत निस्तारण कर आर्थिक जुर्माना लगाकर छोड़ दिया गया।
वहीं, आवश्यक और वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने पर 7 वाहनों को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 207 के तहत मौके पर ही सीज कर दिया गया। जब्त किए गए वाहनों में एक आलीशान थार जीप भी शामिल है, जिसका इंश्योरेंस काफी समय पहले समाप्त हो चुका था और चालक के पास गाड़ी के अन्य पेपर भी नहीं थे।
इसके अलावा, एक मोटरसाइकिल को उसका सरकारी पंजीकरण समाप्त होने के बाद भी सड़क पर दौड़ाने के कारण जब्त किया गया।
सड़क सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाली लोक परिवहन की बसों के खिलाफ भी इस मोबाइल कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। चेकिंग के दौरान एक निजी बस को रोका गया, जिसमें निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक यात्रियों को भेड़-बकरियों की तरह ठंस-ठंस कर भरा गया था।
यात्रियों की जान जोखिम में डालने के इस गंभीर मामले पर मोबाइल मजिस्ट्रेट ने तुरंत संज्ञान लिया और मौके पर ही बस ड्राइवर और ऑपरेटर के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए 4 चार हजार रुपये का नगद जुर्माना ठोक दिया।
अभियोजन अधिकारी लोहिया ने चेतावनी दी है कि जो भी वाहन चालक सड़कों पर ओवरस्पीडिंग, बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट, बिना इंश्योरेंस या शराब पीकर गाड़ी चलाएंगे, उनके खिलाफ न्यायालय की ओर से भविष्य में भी बिना किसी राजनीतिक या प्रशासनिक रियायत के इसी प्रकार की कठोर दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।
जयपुर मेट्रो-II मोबाइल कोर्ट द्वारा शहर के विभिन्न संवेदनशील और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में नियमित रूप से ऐसे ही औचक चेकिंग अभियान चालू रखे जाएंगे ताकि जयपुर की सड़कों को आम नागरिकों के चलने के लिए पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सके।
आम जनता के मन में यह सवाल अक्सर उठता है कि आखिर यह मोबाइल कोर्ट क्या है। दरअसल, यह न्यायपालिका की एक विशेष शाखा है जो एक सर्वसुविधायुक्त बड़ी गाड़ी (वैन या बस) में चलती है।
ऑन-द-स्पॉट सुनवाई: इसमें मजिस्ट्रेट, अभियोजन अधिकारी और अदालती स्टाफ सीधे फील्ड में मौजूद रहते हैं।
तुरंत निपटारा: यदि कोई वाहन चालक अपनी गलती स्वीकार करता है, तो पारंपरिक अदालती चक्कर काटने के बजाय मौके पर ही जुर्माने की राशि तय कर मामले का निपटारा कर दिया जाता है।
कठोर कानूनी पावर: मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicle Act) के तहत इस कोर्ट को मौके पर ही गाड़ी सीज करने, ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड करने और जेल भेजने तक के कानूनी अधिकार प्राप्त होते हैं।
Updated on:
15 Jul 2026 01:12 pm
Published on:
15 Jul 2026 01:12 pm
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