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Rajasthan : जमानती अपराध में महिलाओं को 43 दिन जेल, राजस्थान हाई कोर्ट ने जताई नाराजगी, डीजीपी को दिया कार्रवाई का आदेश

Rajasthan High Court : राजस्थान हाईकोर्ट की एकल पीठ ने जयपुर में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को निर्देश दिया है कि वे दो महिलाओं को जमानती अपराध के मामले में 43 दिनों तक जेल में रखने वाले जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करें।

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Jaipur Women jailed for 43 days for bailable offence Rajasthan High Court expressed displeasure ordered DGP to take action

कोर्ट ने सुनाया फैसला (फाइल फोटो पत्रिका)

Rajasthan High Court : राजस्थान हाईकोर्ट की एकल पीठ ने जयपुर में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को निर्देश दिया है कि वे दो महिलाओं को जमानती अपराध के मामले में 43 दिनों तक जेल में रखने वाले जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करें। इसके साथ ही, कोर्ट ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को आदेश दिया कि वे इस मामले की जानकारी जिले के संरक्षक जज को दें।

आदेश की प्रति गुरुवार को अपलोड की गई

यह आदेश 27 अगस्त को न्यायमूर्ति अनिल कुमार उपमन ने मीतू पारीक और इंदु वर्मा की दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। आदेश की प्रति गुरुवार को अपलोड की गई। 30 जुलाई को दर्ज एक उगाही की धमकी के मामले में हाईकोर्ट ने दोनों महिलाओं को जमानत दी थी और यह स्पष्टीकरण मांगा था कि जमानती अपराध होने के बावजूद जमानत क्यों नहीं दी गई?

स्पष्टीकरण दिया गया पर हाईकोर्ट नहीं हुआ संतुष्ट

सुनवाई के दौरान, ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट और अतिरिक्त जिला जज (एडीजे) नंबर 6, महानगर द्वितीय ने अपना स्पष्टीकरण दिया, पर हाईकोर्ट इससे संतुष्ट नहीं हुआ। न्यायमूर्ति उपमन ने कहा, "न्यायिक अधिकारियों ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि मामले में गैर-जमानती अपराध के तत्व मौजूद थे, लेकिन जमानत खारिज करने के आदेश में इसका कोई उल्लेख नहीं है। ऐसा प्रतीत होता है कि जमानत याचिकाओं का निपटारा यांत्रिक तरीके से किया गया।"

हाईकोर्ट में मिली जमानत

याचिकाकर्ताओं के वकील राजेश महर्षि ने बताया कि चित्रकूट पुलिस स्टेशन ने याचिकाकर्ताओं को एक प्रॉपर्टी डीलर से बलात्कार के मामले में फंसाने की धमकी देकर 3 लाख रुपए का चेक स्वीकार करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। महर्षि ने कहा, "दोनों आरोपी 16 जून, 2025 से न्यायिक हिरासत में थीं, जब यह मामला दर्ज किया गया था। जमानती अपराध होने के बावजूद उन्हें जेल में रखा गया। इसलिए, हमने हाईकोर्ट में जमानत के लिए याचिका दायर की, जिसे 30 जून को मंजूर कर लिया गया।