
अब्दुल बारी / जयपुर ।
अपनी कला के बूते जयपुर ने विश्वभर में खास पहचान बनाई है । यहां विभिन्न प्रकार के ऐसे समाज रहते हैं जिन्होंने पहचान बनाई है । यहां विभिन्न प्रकार के ऐसे समाज रहते हैं जिन्होंने अपने हुनर से जयपुर का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है। इन्ही समाजो में से एक है रहमानी समाज । जो आज भी जूते चप्पल बनाने के पेशे से जुड़ा हुआ है । यूपी, एमपी, कशमीर, बंगाल, बिहार सहित विदेशों में पसन्द की जाने वाली ये जूतियां मुख्य रूप से इसी समाज द्वारा बनाई जाती हैं। समाज के अस्सी प्रतिशत लोग आज भी पुश्तेनी काम से ही जुड़े हुए हैं । जयपुर बसने के समय इन लोगों को यहां बसाया गया था तब यह लोग शाही परिवार के लिए जूतिया बनाया करते थे । उस दौर में जूतियों पर हाथ से बारिक काम किया जाता था। वर्तमान में रहमानी समाज ( मोची बिरादरी ) अन्य पिछड़ा वर्ग में सम्मिलित है । समाज में कई संस्थाएं शिक्षा और विकास पर काम कर रही हैं । नयी पीढ़ी में भी शिक्षा को लेकर काफी जागरूकता आ रही है । समस्या यह है कि समाज का एक बड़ा हिस्सा व्यपारी वर्ग की मजदूरी कर रहा है । काम की मजदुरियों के नही बढ़ने से इन लोगों की आर्थिक स्थिति ठीक नही है ।
मोजड़ी का बढ़ रहा है ट्रेंड
गुजरे जमाने के मुकाबले इस काम में भी बढ़ोतरी हुई है । लेडिस में हाई हील सेंडिल और जेंट्स में लोफर शू के बदले मोजड़ी का ट्रेंड देखने को मिल रहा है । आजकल गर्ल्स शादी प्रोग्राम् से लेकर ऑफिस तक में मोजड़ी पहनने लगी हैं । साथ ही बॉयज में भी जीन्स के साथ मोजड़ी पहनने का चलन बढ़ रहा है । दूसरी और पहले लेदर की जूतियों को लोग ज्यादा पसंद करते थे लेकिन अब लेदर की जगह रेग्जीन और फोम का ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है । हाथ से होने वाली बारिक कढ़ाई की जगह अब मशीनों से खूबसूरत डिजाइन दिए जा रहे हैं ।
क्यों मशहूर है नागरा शू
अपने खास डिज़ाइन, मजबूती, बारिक काम और खूबसूरती के कारण पूरे देश और दुनिया में जयपुर नागरा शू को पसन्द किया जाता है। कीमतों के मामले में भी यह काफी किफायती हैं। इनकी कीमत सौ रूपए से शुरू होकर बारह सौ रूपए तक है।
मुबारक हुसैन
अध्यक्ष , रहमानी शैक्षणिक एवम समाजिक विकास समिति
Published on:
10 Jun 2018 06:11 pm
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