
File PIC
राजस्थान से उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण की एक बड़ी और प्रेरणादायक खबर सामने आई है। अक्सर देखा जाता है कि लोग नया वाहन खरीदने के बाद उसमें आने वाली तकनीकी खामियों से परेशान रहते हैं और कंपनियां सर्विस के नाम पर पल्ला झाड़ लेती हैं। लेकिन जैसलमेर के मुकेश बिस्सा ने हार नहीं मानी और दो साल की कानूनी जंग के बाद कंपनी को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।
प्रकरण के अनुसार, जैसलमेर निवासी मुकेश बिस्सा ने 22 जनवरी 2025 को एक नामी कंपनी का इलेक्ट्रिक स्कूटर बड़े अरमानों के साथ खरीदा था। खरीद के समय कंपनी और डीलर ने बेहतर सर्विस और स्मूथ राइड का लंबा-चौड़ा आश्वासन दिया था। लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली:
जब कंपनी ने बार-बार शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया, तो मुकेश ने जनवरी 2025 में उपभोक्ता आयोग की शरण ली। दो साल तक चली दलीलों और सबूतों के आधार पर आयोग की पीठ ने माना कि कंपनी ने उपभोक्ता को दोषपूर्ण वाहन बेचकर सेवा में गंभीर लापरवाही बरती है।
सुनवाई पूरी होने के बाद उपभोक्ता आयोग ने कंपनी के खिलाफ सख्त फैसला सुनाया। आयोग ने कंपनी को तीन विकल्प दिए हैं, लेकिन मुख्य रूप से उपभोक्ता को बड़ी राहत प्रदान की है:
राजस्थान में इन दिनों इलेक्ट्रिक स्कूटरों की बाढ़ आई हुई है, लेकिन गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। जैसलमेर का यह फैसला उन सभी कंपनियों के लिए नजीर है जो ग्राहकों को लुभावने विज्ञापनों से फंसा लेती हैं लेकिन बाद में खराब पार्ट्स के नाम पर टरकाती रहती हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि ग्राहक की सुरक्षा और संतुष्टि से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुकेश बिस्सा की यह जीत जैसलमेर ही नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान के उपभोक्ताओं के लिए एक संदेश है। अगर आप भी किसी खराब प्रोडक्ट या खराब सर्विस से परेशान हैं, तो 'कन्ज्यूमर कोर्ट' आपके अधिकारों की रक्षा के लिए तैयार है। यह मामला साबित करता है कि बिल और दस्तावेज सही हों, तो न्याय जरूर मिलता है।
Updated on:
21 Apr 2026 12:59 pm
Published on:
21 Apr 2026 12:59 pm
