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पुलिस कार्यवाही से उर्दू शब्दों को हटाकर हिन्दी भाषा का प्रयोग करने के लिए गृह राज्यमंत्री बेढम ने लिखा पत्र

पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर कहा है कि यह मुगलकाल से चले आ रहे शब्द हैं, जिन्हें आमजन नहीं समझ पाते। इसमें बदलाव के लिए प्रस्ताव भिजवाने को कहा है।

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पुलिस और अदालती कामकाज में लगभग हर प्रक्रिया की भाषा में हिंदी के साथ उर्दू और फारसी के शब्दों का उपयोग होता आ रहा है। गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने प्रक्रिया से उर्दू शब्दों को हटाने की मंशा जाहिर की है। उन्होंने पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर कहा है कि यह मुगलकाल से चले आ रहे शब्द हैं, जिन्हें आमजन नहीं समझ पाते। इसमें बदलाव के लिए प्रस्ताव भिजवाने को कहा है।

पत्र में यह लिखा गृह राज्य मंत्री ने


पुलिस कार्यवाही, अनुसंधान पत्रावलियों, पत्र एवं अन्य व्यावहारिक कार्यों में उर्दू शब्दों का अधिकतर प्रयोग किया जाता है। उर्दू शब्दों का प्रयोग मुगल काल से पुलिस विभाग में चलता आ रहा है, क्योंकि तात्कालिक समय में उर्दू का ज्ञान शासकों एवं उनके की ओर से संचालित संस्थाओं में अनिवार्य रूप से अर्जित करना होता था। पुलिसकर्मियों, परिवादियों तथा आमजन को उर्दू का ज्ञान नहीं होने से अर्थ का अनर्थ हो जाता है, जिससे अक्सर न्याय मिलने में विलम्ब होता है। पुलिस कार्यप्रणाली में उर्दू शब्दों के स्थान पर हिन्दी शब्दों का प्रयोग किए जाने के लिए प्रस्ताव तैयार कराकर प्रस्तुत करें। इससे सक्षम स्तर से निर्णय कराने की प्रक्रिया पूर्ण की जा सकें। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कानूनी कार्यवाही में क्लिष्ट भाषा का मसला उठाया था।

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दिल्ली हाइकोर्ट ने भी दिए निर्देश


दिल्ली हाइकोर्ट ने भी 2019 में दिल्ली पुलिस को एफआइआर दर्ज करते वक्त उर्दू और फारसी शब्दों के बेवजह इस्तेमाल से बचने के निर्देश दिए थे।

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जानिए कुछ जटिल से शब्द


अदम तामील- नोटिस सर्व नहीं होना
अदम पैरवी- बिना पक्ष रखे
अहकाम- महत्वपूर्ण
इमरोजा- एक ही दिन सारा काम
चाराजोई- वादी की ओर से न्यायालय में संज्ञान लेने के लिए की गई अपील
फर्द अफराद- थाने में जो व्यक्ति किसी घटना की सूचना देता है
माल मसरूका- चोरी की संपत्ति
मजरूब- पीड़ित
मफरूर- फरार अपराधी
मिन जानिब- की ओर से
मुसम्मी- नाम के आगे लगने वाला सम्मानसूचक शब्द
दरयाफ्त- तय तारीख
मतलूब- तय