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JDA Free Left System: जयपुर की सड़कों को जेडीए वाहन फ्रेंडली बनाने पर काम कर रहा है। फ्री लेफ्ट की सुविधा कारगर कदम है लेकिन कई चौराहों और तिराहों पर इसके लिए विकसित किए गए सिस्टम ने राहगीरों की जेब्रा क्रॉसिंग पर अतिक्रमण कर दिया है। फ्री लेफ्ट के नाम पर बनाई गई व्यवस्था ने पैदल यात्रियों को सड़क पर बेहद असुरक्षित कर दिया है। शहर के कई चौराहों पर राहगीरों को तेज रफ्तार वाहनों के बीच से जान जोखिम में डालकर सड़क पार करनी पड़ रही है।
गांधीनगर तिराहा, मोती डूंगरी गणेश मंदिर चौराहा, सहकार मार्ग और टोंक रोड जैसे व्यस्त इलाकों में यह समस्या सबसे ज्यादा नजर आई। कई जगहों पर फ्री लेफ्ट के लिए बनाई गई नई लेन और कट के कारण जेब्रा क्रॉसिंग छोटी हो गई है या पूरी तरह प्रभावित हुई है। इससे स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सड़क पार करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2025 में पैदल यात्री सुरक्षा को संवैधानिक अधिकार घोषित किया। कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया कि जेब्रा क्रॉसिंग और फुटपाथ पर किसी भी तरह का अतिक्रमण स्वीकार नहीं है। सभी राज्यों को पैदल यात्री सुरक्षा के लिए ऑडिट रिपोर्ट तैयार करने, हाई-विजीबिलिटी मार्किंग, पर्याप्त रोशनी और सुरक्षित डिजाइन लागू करने का आदेश दिया गया है।
इस बार की ट्रैफिक कंट्रोल बोर्ड की बैठक में 20 जंक्शन को फ्री लेफ्ट बनाए जाने का एजेंडा यातायात पुलिस ने जेडीए को सौंपा है। इसमें दक्षिण क्षेत्र के 11, पश्चिम क्षेत्र के सात और उत्तर क्षेत्र के दो प्रमुख जंक्शन शामिल हैं। 31 मई तक जेडीए विस्तृत प्लान तैयार करेगा। गांधी पथ, धावास, आम्रपाली, वैशाली और सिरसी रोड पुलियाओं को चारों ओर से फ्री लेफ्ट बनाने का प्रस्ताव बैठक में रखा गया। हालांकि, इन पुलियाओं के आसपास पर्याप्त जगह और यातायात दबाव को देखते हुए फ्री लेफ्ट विकसित करने के लिए उपयुक्त स्थानों की तलाश भी करनी होगी।
जंक्शन पर जगह की दिक्कत है। इस वजह से कई जगह जेबा क्रॉसिंग प्रभावित हुई है। नए सिरे से जेब्रा क्रॉसिंग को पीछे बनाया जाएगा। इससे वाहन चालक चौराहे-तिराहे से दूर खड़े होंगे और राहगीर भी बिना किसी बाधा के निकल सकेंगे।
संजीव जैन, निदेशक, अभियांत्रिकी शाखा, जेडीए
Updated on:
18 May 2026 07:11 am
Published on:
18 May 2026 06:55 am
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