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पत्नी की उम्र 18 साल से ऊपर तो पति पर नहीं बनता बलात्कार का मामला : राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने पति पर दर्ज बलात्कार के दो अलग-अलग मामलों की सुनावाई के दौरान महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि यदि पत्नी बालिग है तो वह पति पर बलात्कार का मामला नहीं दर्ज करा सकती है। कोर्ट ने इस तरह के मामलों पर चिंता भी जाहिर की।

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जयपुर

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Kamal Mishra

May 17, 2026

rajasthan high court

राजस्थान हाईकोर्ट। पत्रिका फाइल फोटो

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी है कि वैध विवाह है और विवाह के समय पत्नी बालिग हो तो पति के खिलाफ बलात्कार का मामला नहीं बनता। कोर्ट ने एक मामले में फिजूल की मुकदमेबाजी पर चिंता भी जाहिर की। कोर्ट ने कहा कि इस कारण मुकदमा लंबा चलने से न्याय में देरी होती है, जो नाइंसाफी जैसा है। न्यायपालिका को ऐसे प्रकरणों से बचने के प्रयास करने के साथ ही न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखने की पूरी कोशिश करनी चाहिए।

न्यायाधीश अनूप कुमार ढंड ने पिछले दो अलग-अलग मामलों में बलात्कार की एफआइआर रद्द करते हुए कुछ इसी तरह की टिप्पणी की है। कोर्ट ने इन मामलों में कहा कि पीड़िताएं विवाह के समय 18 वर्ष से अधिक आयु की थीं और विवाह वैध तरीके से हुआ, ऐसे में बलात्कार की एफआइआर कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

एक मामले में पत्नी की तरफ से बलात्कार और दहेज प्रताड़ना दोनों के मुकदमे दर्ज कराए गए थे, इसपर कोर्ट ने कहा कि 'जब बलात्कार हुआ तो पत्नी नहीं हो सकती और दहेज प्रताड़ना का केस पत्नी के रूप में लगाया गया है। इस तरह से कानून का दुरुपयोग नहीं किया ज सकता है।

केस-1

विवाह जयपुर में हुआ और आयु करीब 19 वर्ष थी। मार्च 2021 में विवाह का पंजीयन हो गया। बाद में युवक पत्नी को साथ रहने का निर्देश देने की गुहार लेकर पारिवारिक न्यायालय पहुंचा, जबकि युवती ने विवाह विच्छेद के लिए प्रार्थना पत्र पेश किया। राहत नहीं मिलने पर दोनों पक्ष हाईकोर्ट पहुंचे। इसी बीच युवती ने बलात्कार का मामला दर्ज कराया। कोर्ट ने सुनवाई के बाद कहा कि लगता है विवाह सहमति से हुआ, लेकिन बाद में मन बदलने पर पीड़िता ने बलात्कार का केस दर्ज करवा दिया। कोर्ट ने परिस्थितियों के आधार पर एफआइआर रद्द करते हुए कहा कि बलात्कार का मामला नहीं बनता।

केस-2

आर्य समाज में 2020 में विवाह हुआ। बाद में सवाई माधोपुर में एक बलात्कार का मामला दर्ज हुआ, जबकि दूसरा दहेज प्रताड़ना का। इस पर कोर्ट ने कहा कि बलात्कार का आरोप है तो पीड़िता पत्नी नहीं है और दहेज प्रताड़ना का आरोप पत्नी के रूप में लगाया गया है। ऐसे में दो विरोधाभासी एफआइआर दर्ज करवाकर कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग की इजाजत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने टिप्पणी की कि फिजूल के मामलों के कारण ही न्याय में देरी हो रही है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला

हाईकोर्ट ने कहा कि IPC की धारा 375 के अपवाद 2 के तहत यदि पत्नी नाबालिग नहीं है, तो पत्नी के साथ पति के द्वारा यौन सबंध बनाना बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नवतेज सिंह जौहर बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया।