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कभी खास दाेस्त थे जीवनराम गोदारा आैर आनंदपाल सिंह, जानिए कैसे हाे गए एक-दूसरे के खून के प्यासे

Jeevan Ram Godara Murder Case- कभी जीवनराम गोदारा आैर आनंदपाल सिंह दाेस्त थे। जानिए दाेनाें कैसे हाे गए एक-दूसरे के खून के प्यासे।

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Jeevan Ram Godara Murder

जयपुर। Jeevan Ram Godara Murder Case- राजस्थान के बहुचर्चित जीवनराम गोदारा हत्याकांड मामले का 11 साल 8 माह के लम्बे इंतेजार के बाद फैसला आ गया। पुलिस एनकाउंटर में मारे गए गैंगस्टर आनंदपाल सिंह से जुड़े इस प्रकरण में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने 4 आरोपियों को दोषी करार दिया है।

इन आरोपितों को 5 मार्च को सजा सुनाई जाएगी, जबकि आनन्दपाल सिंह के भाई मंजीत सिंह सहित 11 जनों को कोर्ट ने दोष मुक्त करने के आदेश दिए हैं। आपकाे बता दें कि जीवनराम गोदारा आैर आनंदपाल के बीच एक समय गहरी दाेस्ती थी लेकिन समय के साथ दाेनाें के रिश्ताें में दरार आ गर्इ।

दरअसल साल 1992 में आनंदपाल सिंह की शादी की बिन्दौरी को कुछ दबंगों ने रुकवा दी थी और पथराव भी किया। गांव के दबंग लोगों ने आनंदपाल सिंह के पिता को दूल्हे की घोड़ी पर बिन्दौरी नहीं निकालने की हिदायत दे डाली। उस समय छात्र नेता के रूप में जीवनराम गोदारा का दबदबा था और आनंदपाल सिंह ने पूरी बात दोस्त को बताई।

जीवनराम और उसके साथी सांवरदा पहुंचे और आनंदपाल के साथ मिलकर असमानता का विरोध कर गांव में बिन्दौरी निकलवाई। मगर इस घटना ने आनंदपाल की जिंदगी की धारा ही बदल डाली और आनंदपाल सिंह बन गया गैंगस्टर आनंदपाल सिंह।

समय के साथ आनंदपाल ने अपने ख़ास दोस्त जीवन गोदारा से भी रिश्ते तोड़कर रास्ता अलग कर लिया। लगातार बढ़ती दुश्मनी में दोनों एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए।

सूत्र बताते हैं कि दुश्मनी में अपशब्द बोले जाने को लेकर आनंदपाल सिंह खफा हो गया। इसी के परिणाम स्वरूप 27 जून 2006 मंगलवार की शाम को 6:30 बजे गोदारा मार्केट गोलियों की आवाज से गूंज उठा था।

मार्केट में पट्टीदार शू हाऊस में बैठे जीवनराम गोदारा एवं हरफूल जाट, शंकर मेघवाल, प्रमोद एवं गोपालराम पर काली बोलेरो में आए 10-15 हथियारबंद लोगों ने अंधाधुंध गोलियां चलाई।

गोलीकांड में 5 लोग घायल हुए। सभी घायलों को डीडवाना के बांगड़ अस्पताल ले गए। जयपुर रेफर के दौरान रास्ते में जीवन राम व हरफूल की मौत हो गई। घटना से डीडवाना दहल गया ।

मामला इतना बढ़ा कि पूरे राज्य की लंबे समय तक डीडवाना पर नजर रही। डीडवाना तीन दिन बंद रहा। महापड़ाव हुआ तो विधानसभा में भी कई बार डीडवाना हत्याकांड की गूंज सुनाई दी।

जीवन गोदारा हत्याकांड के बाद आंनदपाल सिंह प्रदेश में दहशत का दूसरा नाम बन गया। गोदारा हत्याकांड में आनंदपाल के मंझले भाई मंजीतपाल सिंह का भी नाम सामने आया था।