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न्याय की राह में बाधा बनकर खड़ा हो गया काला कानून, अदालत ने दिया अध्यादेश का हवाला

राज्य सरकार हाईकोर्ट में बार-बार कह रही है कि सीआरपीसी व आईपीसी में संशोधन वाला आध्यादेश यानी काला कानून 4 दिसंबर को स्वत: खत्म हो जाएगा।

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kala kanoon

जोधपुर/जयपुर। राज्य सरकार हाईकोर्ट में बार-बार कह रही है कि सीआरपीसी व आईपीसी में संशोधन वाला आध्यादेश यानी काला कानून 4 दिसंबर को स्वत: खत्म हो जाएगा। विधेयक पर प्रवर समिति पुनर्विचार कर रही है। इसके विपरीत राजसमंद के देवगढ़ में काले कानून ने एक छात्र को पुलिस की पिटाई के मामले में न्याय से वंचित कर दिया है। थाने में पिटाई को लेकर छात्र की ओर से पेश इस्तगासे पर अदालत ने सुनवाई से इनकार कर दिया है।

अदालत ने इसके लिए अध्यादेश का हवाला दिया है। थाने में पिटाई से पीडि़त छात्र पुलिस अधीक्षक कार्यालय से लेकर अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट तक भटका लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। पिटाई के आरोपित पुलिसकर्मियों के खिलाफ न तो एफआईआर दर्ज की जा रही है, न पुलिस के आला अधिकारी कोई सुनवाई कर रहे हैं। यहां तक कि छात्र अदालत पहुंचा तो देवगढ़ की स्थानीय अदालत में वाद ही खारिज हो गया है।

कोर्ट का कार्रवाई से इनकार
न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इस्तगासा खारिज करते हुए आदेश में लिखा कि पुलिस अधिकारी लोकसेवक है। इन्होंने कार्यवाही पद के कर्तव्य निर्वहन में की होगी। इस मामले में परिवादी ने सक्षम अधिकारी से अभियोजन स्वीकृति नहीं ली है। अत: धारा १५६ (३) सीआरपीसी के तहत न्यायालय कोई जांच या कार्यवाही नहीं कर सकता।

यह है मामला
देवगढ़ के राजकीय महाविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव 2017-18 के दौरान एनएसयूआई, एबीवीपी एवं निर्दलीय वीएसएस के प्रत्याशियों ने नामांकन भरे थे। अध्यक्ष सहित दो मुख्य पदों पर वीएसएस प्रत्याशी जीते और उपाध्यक्ष पद पर एबीवीपी प्रत्याशी विजयी हुआ। चुनाव में माहौल खराब होने के बाद कॉलेज में बाहरी छात्रों के आने पर प्रतिबंध लगाया गया था। फिर फ्रेशर पार्टी के दौरान पीडि़त छात्र गणपत सिंह बल्ला महाविद्यालय में अपनी टीसी एवं मार्कशीट लेने पहुंचा था, जिसे लेकर कुछ छात्राओं ने हुड़दंग मचा दिया। उन्होंने बाहर से हुड़दंगी बुला लिए, जिन्होंने कॉलेज में हंगामा किया।

इस दौरान पुलिस आई तो हुड़दंगी तो भाग गए, गणपत सिंह वहीं रहा। पुलिस ने प्रिंसिपल के कहने पर उसे गिरफ्तार कर लिया और थाने ले गई। आरोप है कि 22 नवम्बर को हुए इस घटनाक्रम में 23 वर्षीय गणपत सिंह को पुलिस ने थाने में थानाधिकारी व तीन कांस्टेबलों ने निर्वस्त्र कर उलटा लटकाया और बैल्ट से पीटा। छात्र ने राजसमंद पुलिस अधीक्षक को शिकायत की लेकिन जवाब नहीं मिला। थाने में एफआईआर देने का प्रयास किया लेकिन दर्ज नहीं हुई। इस पर अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट देवगढ़ के समक्ष सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत परिवाद पेश किया।

इधर हाईकोर्ट ने पुनर्विचार के लिए दिया 4 दिसंबर तक का समय
राज्य सरकार के सीआरपीसी की धाराओं में संशोधन के लिए जारी आध्यादेश व उसके बाद प्रवर समिति को सौंपे गए प्रस्तावित विधेयक को चुनौती देने वाली याचिका की मंगलवार को जस्टिस संगीत लोढ़ा व जस्टिस विनीत माथुर की खंडपीठ में सुनवाई हुई। इसमें सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार ने जवाब पेश किया। पंवार ने कहा कि अभी कानून निर्माण की अवस्था में है और प्रवर समिति इस पर पुनर्विचार कर रही है। इसकी बैठक आज ही हो रही है इसलिए पुनर्विचार के लिए समय दिया जाए। वैसे भी आध्यादेश की समय सीमा 4 दिसंबर को समाप्त हो रही है। इस पर हाईकोर्ट खंडपीठ ने 4 दिसम्बर तक का समय देते हुए अगली सुनवाई 5 दिसम्बर को तय की।

सुनवाई की शुरुआत में याचिकाकर्ता एजाज अहमद के अधिवक्ता नीलकमल बोहरा ने अध्यादेश को काला कानून बताते हुए रोक लगाने की मांग की। इसे संविधान में आम नागरिकों को प्रदत्त अधिकारों के विरुद्ध बताते हुए तुरंत रोक लगाने की मांगी। इस बीच उन्होंने इसी कानून के तहत राजसमंद जिले के देवगढ़ मजिस्ट्रेट द्वारा खारिज निर्णय भी पेश किया। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि याचिका खारिज नहीं की जा रही है। सरकार इसे री-कंसीडर नहीं करती है तो 5 दिसम्बर को आगे सुनवाई करेंगे। अब तक सुनवाई पूरी नहीं हुई है।

यहां आनन-फानन बैठक, नहीं हुई चर्चा
लोकसेवकों के संरक्षण के लिए लाए गए विधेयक (काले कानून) और एक अन्य विधेयक को लेकर गठित प्रवर समिति की मंगलवार को आनन-फानन बैठक बुलाई गई। आधे घंटे चली बैठक में सिर्फ अन्य विधेयक पर चर्चा हुई। अब अगली बैठक 27 दिसंबर को होगी।

कानून काला है या सफेद, इसका फैसला कमेटी करेगी। इस कानून की समीक्षा कमेटी कर रही है।
- गुलाबचंद कटारिया, गृहमंत्री (पुलिस मुख्यालय में मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा)