दरअसल, जस्टिस पंकज भंडारी और जस्टिस प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने जमानत की अर्जी पर फैसला सुनाया। खंडपीठ ने कहा कि, एनआईए (NIA) ने केवल कॉल डिटेल के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया है। जावेद के खिलाफ सबूत अपर्याप्त हैं और इसे हिरासत में रखना जरूरी नहीं है। जिसके बाद आज शनिवार 7 सितंबर को उसे अजमेर (Ajmer) की हाई सिक्योरिटी जेल से रिहा किया गया। खंडपीठ ने कहा कि एनआईए आरोपी की लोकेशन साबित नहीं कर पाई। साथ ही साथ आरोपी से किसी तरह की रिकवरी भी नहीं हुई है। लंबे समय से वो जेल में है, ट्रायल लंबा चलेगा। ऐसे में उसे जमानत दी जाए।