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गोलियों से छलनी होने पर भी राजस्थान का ये सपूत बहाता रहा दुश्मनों का खून, पूरा देश करता है इन्हें सल्यूट

गोलियों से छलनी होने पर भी राजस्थान का ये सपूत बहाता रहा दुश्मनों का खून, पूरा देश करता है इन्हें सल्यूट...
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जयपुर

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Dinesh Saini

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Updated: 26 Jan 2018, 5:28 PM IST

KARGIL MARTYR CAPT AMIT BHARDWAJ

दोनों पैरों में गोलियां लगी, खून की धाराएं बहने लगी, फिर भी पीछे हटने के बजाए दुश्मनों से मुकाबला करना ही धर्म समझा और वीरता से लड़ते हुए मातृभूमि के चरणों में प्राण न्यौछावर कर दिए।

KARGIL MARTYR CAPT AMIT BHARDWAJ

ऐसे थे जयपुर के जांबाज लेफ्टिनेंट ‘अमित भारद्वाज‘।

KARGIL MARTYR CAPT AMIT BHARDWAJ

राजस्थान की माटी में जन्मे अमित ने कारगिल के युद्ध में गोलियां लगने के बावजूद पाकिस्तानी घुसपेटियों को पीठ दिखाने के बजाए उनसे लौहा लिया।

KARGIL MARTYR CAPT AMIT BHARDWAJ

27 वर्षीय राजस्थान का ये जांबाज सपूत दुश्मनों को पीठ दिखाने के बजाए उनसे लौहा लेते हुए शहीद हो गया और पूरे देश को गोरान्वित कर गया।

KARGIL MARTYR CAPT AMIT BHARDWAJ

लेफ्टिनेंट अमित कारगिल सेक्टर में बजरंग चौकी के निकट शहीद हुए थे और वह क्षेत्र पाकिस्तानी घुसपेटियों के कब्ज में रहा और लेफ्टिनेंट अमित का शव साठ दिनों तक पहाड़ों पर पड़ा रहा।

KARGIL MARTYR CAPT AMIT BHARDWAJ

अमित के शव की चमड़ी गलने लग गई थी। इसलिए उनका शव ताबूत से बाहर ही नहीं निकाला गया। उनके मां-बाप और परिवार के अन्य सदस्य अपने लाड़ले ‘अन्नू‘ का आखिरी बार चेहरा भी नहीं देख पाए। ताबूत खोले बिना ही सभी धार्मिक क्रियाएं निपटाई। चिता पर भी इस सपूत का शव ताबूत सहित ही रखा गया और अंतिम विदाई दी गई।

अमित को फोटोग्राफी का भी बहुत शौक था। उसके पास अपने खींचे फोटो के 15 एलबम थे।

KARGIL MARTYR CAPT AMIT BHARDWAJ

अमित भारद्वाज हनुमान जी के परम भक्त थे। वे शुरू से ही जिंदादिल और निडर इंसान थे।