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कोटपूतली में तेज रफ्तार डंपर ने बाइक को मारी टक्कर, चाचा-भतीजी की मौत, फूटा जनाक्रोश

Kotputli Road Accident : कोटपूतली में नीमकाथाना बाईपास स्थित गोपालपुर चौराहे पर हुए भीषण सड़क हादसे में चाचा और भतीजी की दर्दनाक मौत के बाद ग्रामीणों का गुस्सा प्रशासनिक लापरवाही पर फूट पड़ा।
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Kotputli road accident

चाचा-भतीजी की मौत के बाद फूटा जनाक्रोश। फोटो पत्रिका

Kotputli Road Accident : कोटपूतली। एक परिवार अपनी पांच वर्षीय मासूम बच्ची को सकुशल घर लाने निकला था, लेकिन कुछ ही पलों में उसकी खुशियां मातम में बदल गईं। नीमकाथाना बाईपास स्थित गोपालपुर चौराहे पर मंगलवार सुबह हुए भीषण सड़क हादसे में चाचा और भतीजी की दर्दनाक मौत के बाद ग्रामीणों का गुस्सा प्रशासनिक लापरवाही पर फूट पड़ा। हादसे के बाद पुलिस और एम्बुलेंस के समय पर नहीं पहुंचने से आक्रोशित लोगों ने बाईपास पर जाम लगा दिया। विरोध के दौरान एम्बुलेंस के शीशे तोड़ दिए गए, जबकि डंपर को आग लगाने का भी प्रयास किया गया। सबसे गंभीर स्थिति तब बनी जब करीब डेढ़ घंटे तक दो थानों की पुलिस क्षेत्राधिकार के विवाद में उलझी रही और दोनों शव सड़क पर पड़े रहे।

जानकारी के अनुसार ग्राम बनार की ढाणी काकड़वाड़ी निवासी महेंद्र यादव (40) अपनी पांच वर्षीय भतीजी सुजीता को लेकर बाइक से गांव लौट रहे थे। सुबह करीब 10 बजे गोपालपुर चौराहे पर सड़क पार करते समय पनियाला की ओर से तेज गति से आए डंपर ने बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक डंपर में फंसकर काफी दूर तक घिसटती चली गई। हादसे में महेंद्र और मासूम सुजीता की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और पीछा कर डंपर को रुकवा लिया, लेकिन चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया। इसके बाद पुलिस और एम्बुलेंस को सूचना दी गई, लेकिन समय पर राहत नहीं मिलने से लोगों का गुस्सा बढ़ता गया।

थाना प्रभारी सिविल ड्रेस में लोगों से उलझते नजर आए

प्रत्यक्षदर्शी ग्रामीणों का आरोप है कि पहले बनेठी पुलिस चौकी को सूचना दी गई, लेकिन क्षेत्राधिकार का हवाला देकर कार्रवाई से बचा गया। दूसरी ओर पनियाला थाना भी घटनास्थल को अपनी सीमा से बाहर बताता रहा। इस खींचतान में करीब डेढ़ घंटे तक शव सड़क पर पड़े रहे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मौके पर पहुंचे एक थाना प्रभारी सिविल ड्रेस में लोगों को समझाने के बजाय उनसे उलझते नजर आए, जबकि वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थिति से स्थिति और बिगड़ गई।

सूचना मिलने पर पूर्व संसदीय सचिव रामस्वरूप कसाना, रामनिवास यादव, राधेश्याम शुक्ला सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों की मांगों का समर्थन किया। बाद में एसडीएम योगेश देवल, तहसीलदार रामधन गुर्जर तथा अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों से वार्ता की। प्रशासन ने नियमानुसार मुआवजा दिलाने, गोपालपुर चौराहे पर स्पीड ब्रेकर बनाने तथा आवश्यक सुरक्षा उपाय करने का आश्वासन दिया। इसके बाद जाम समाप्त हुआ और दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए राजकीय बीडीएम अस्पताल की मोर्चरी भिजवाया गया।

दुर्घटनाओं का ब्लैक स्पॉट

ग्रामीणों ने बताया कि गोपालपुर चौराहा लंबे समय से दुर्घटनाओं का ब्लैक स्पॉट बना हुआ है। पुलिस और ग्रामीण कई बार सार्वजनिक निर्माण विभाग को स्पीड ब्रेकर, चेतावनी संकेतक और अन्य सुरक्षा उपायों की मांग कर चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उनका कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा इंतजाम किए गए होते तो यह दर्दनाक हादसा टाला जा सकता था।