
भारत में युवाओं और बच्चों की मृत्युदर हुई कम (फोटो-फ्रीपिक)
जयपुर। भारत में दो दशक में बच्चों की मौतों की संख्या में सबसे ज्यादा कमी आई है। इस दौरान बीमारियों, संक्रमण, जन्म के समय शिशु या मां की खराब सेहत की वजह से होने वाली सालाना औसत मौतों की बदलाव दर (एएआरसी) में 15.7% कमी आई है। इसी तरह 15 से 49 वर्ष के युवाओं की मौतों में भी बड़ी गिरावट लाने में भारत सफल रहा। यह खुलासा चिकित्सा जर्नल लैसेट की रिपोर्ट में हुआ।
लैंसेट ने दुनिया में ऐसी बीमारियों व वजहों का विश्लेषण किया जो 2010 के दशक में 72% और 2020 के दशक में 65% मौतों की जिम्मेदार थीं। इनमें डायरिया, मां व शिशु का खराब स्वास्थ्य, संक्रमण आदि शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बच्चों की मौत 29 फीसदी से घटकर 16 प्रतिशत हो गई है। गौरतलब है कि रिपोर्ट में आंकड़ों का आकलन एएआरसी में किया गया है। इसे ऐसे समझें कि एक देश में 2010 में 1 लाख मौतें हुई। 2011 में यह 90 हजार रह गई। इस तरह 10 हजार की यह कमी माइनस 10 एएआरसी कही जाएगी।
मौत की 15 वजहों में सात गैर-संक्रामक रोग व हादसों को शामिल किया गया है। इनमें डायबिटीज, स्ट्रोक, सड़क हादसे, आत्महत्या, संक्रमण शामिल हैं। इनसे दुनिया में मौतें 43 से बढ़कर 49% हो चुकी है। यह भारत के लिए चेतावनी हैं क्योंकि यहां हादसों से मौतें बढ़ी है। डायबिटीज से 20 साल में 4.8% मौतें बढ़ीं है।
यहां भी भारत, मध्य व पूर्वी यूरोप और सब-सहारा अफ्रीका ने सबसे ज्यादा मौतें घटाईं। अमरीका में एएआरसी पॉजिटिव रही, मौतें बढ़ी।
यहां भारत सहित दुनिया में मौतें बढ़ी, केवल सब-सहारा क्षेत्र में कमी आई। भारत के लिए अनुमान दिए कि 2050 में कुल मौतों में 70 वर्ष जी चुके लोग 64% होंगे। अभी यह 50% है।
2010 के दशक के मुकाबले 2020 तक भारत में इस आयु वर्ग में एएआस्सी माइनस 6.3 रही। यह चीन की माइनस 8.5 व यूरोप की माइनस 7.6 एएआरसी के बाद सबसे बेहतर है।
भारत में बच्चों की मौतें रोकने में शिशु व मां के स्वास्थ्य में सुधार, संक्रमण से बचाव, टीकाकरण, पोलियो सहित कई बीमारियों के उन्मूलन से सफलता पाई। युवाओं की आत्महत्या में बीते दो दशकों में भारत ने बढ़ती आबादी के अनुपात में 1.4 एएआरसी की कमी की है। रिपोर्ट कहती है कि डायबिटीज, हृदय रोग, तंबाकू सेवन से हो रही बीमारियों पर नियंत्रण से इसे और सुधारा जा सकता है।
Published on:
07 Sept 2025 11:04 am
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
