
बीमारी को पीछे छोड, कैसे पहुंची आॅल इंडिया टॉप—5 में, जानें पूरी कहानी
जयपुर. इमेजिन करें कि आप एक सिनेमाघर में फिल्म देख रहे हों और उसकी सभी लाइट्स एक साथ जला दी जाएं, जाहिर है आपको फिल्म देखने में समस्या होगी, मुझे ये समस्या रोजाना की लाइफ में होती है। मैं श्रेया कचोलिया हूं। बचपन से ही मुझे जीन साइंड्रोम अफैक्ट है। मुझे 60 प्रतिशत तक कम दिखाई देता है। वहीं इम्यून सिस्टम ठीक नहीं रहता। यह एक एेसी डिजीज है, जो किसी भी ऑपरेशन से ठीक नहीं हो सकती। स्किन डिजीज मुझे आसानी से घेर लेती है। यदि एक बार स्नीज शुरू हो जाए तो रुकने का नाम नहीं लेगी। 12वीं के एग्जाम से पहले क्रॉनिक फूड डिजीज हो गई थी, लेकिन हॉस्पिटल में एडमिट नहीं हुई, क्योंकि मुझे एग्जाम देना था।
इन्होंने सिखाया चुनौतियों से लडना
मुझमें चुनौतियों से लडऩे का यह साहस मेरे पेरेंट्स और टीचर्स ने भरा है। उन्होंने मुझे कभी अलग तरीके से ट्रीट नहीं किया। मैं अब इन सभी चीजों की हैबिचुअल हो चुकी हूं। इसलिए जिंदगी की हर परीक्षा के लिए मैं हमेशा तैयार रहती हूं।
मोटिवेशनल बुक्स नहीं पढ़ती, इमोशनल हो जाती हूं
मुझे बुक्स पढऩे का शौक है, लेकिन मोटिवेशनल बुक्स नहीं पढ़ती, क्योंकि ये इमोशनल कर देती हैं। 10वीं में हैलन कैलर की स्टोरी इसलिए पढ़ी क्योंकि वो मेरे कोर्स में शामिल थी, लेकिन जब उन्हें पढ़ा तो लगा कि जब इतनी डिसेबिलिटी के बावजूद वे दुनिया के टॉप स्कूल-कॉलेजों में दाखिला ले सकती हैं, तो मुझे तो भगवान ने काफी बेहतर बनाया है। इतना कि मैं देख सकती हूं, सुन सकती हूं। बस, इसी लगन के साथ जेईई का भी एग्जाम दिया था, जिसमें मुझे यह सफलता मिली है।
ये है सपना
आइआइटी दिल्ली से कम्प्यूटर साइंस ब्रांच में इंजीनियरिंग करना चाहती हूं। साथ ही एक एेसा डिवाइस डवलप करना चाहती हूं जिससे रेटिना रूम की ब्राइटनैस कम हो जाए और मेरे जैसे दूसरे स्टूडेंट्स की समस्या खत्म हो जाए।
सिचुएशन से डरें नहीं, सामना करें
दूसरे स्टूडेंट्स के लिए मैं कहना चाहती हूं कि आप बहुत डिफरेंट नहीं हो। किसी भी सिचुएशन से डरने या घबराने की जरूरत नहीं है। मुझे भगवान ने एेसा बनाया है, मेरे लिए यही बैटर है। यदि किसी प्रॉब्लम का सॉल्यूशन नहीं मिला है तो इसका मतलब यह है कि मुझे उसे ढूंढऩा है।
Published on:
11 Jun 2018 02:53 pm
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