
अब्दुल बारी
प्रदेश के विभिन्न जिलों में 12 यूनानी राजकीय अस्पताल हैं, लेकिन इनमें मौजूद इलाज और सुविधाओं का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इन सभी अस्पतालों में मरीजों की भर्ती प्रक्रिया ही ठप पड़ी है। पत्रिका की पड़ताल में सामने आया कि जयपुर समेत विभिन्न जिलों में मौजूद इन अस्पतालों में लंबे समय से एक मरीज भी भर्ती नहीं किया गया।
दरअसल, इन चिकित्सालयों में बुनियादी सुविधाओं और डॉक्टरों-कर्मचारियों की भारी कमी और आधुनिक उपकरणों के अभाव के चलते स्टाफ ने मरीजों को भर्ती करना ही बंद कर दिया है। करोड़ों का बजट मिलने के बाद भी यूनानी विभाग इन अस्पतालों की अव्यवस्थाओं पर ध्यान नहीं दे रहा। ऐसे में यह अस्पताल नाम मात्र के साबित हो रहे हैं।
पांच वर्षों से लगातार यूनानी पद्धति से इलाज लेने वाले रोगियों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। सत्र 24-25 में प्रदेश में 62 लाख, 12 हजार रोगियों ने राजकीय यूनानी चिकित्सालयों/ओषधालयों में परामर्श लिया है।
जयपुर. चार दरवाजा स्थित चिकित्सालय पर ओपीडी समय के अलावा ताला लगा रहता है। चिकित्सालय प्रभारी ने निदेशालय को लिखित में सूचित कर दिया है कि स्टाफ की कमी के कारण यहां मरीजों को 24 घंटे नहीं रखा जा सकता। ऐसे में 6 माह से एक भी मरीज भर्ती नहीं किया।
सीकर. फतेहपुर चिकित्सालय के प्रभारी डॉ. शाहिद ने बताया कि व्यवस्था के अभाव के कारण यहां पिछले 6 सालों से एक भी मरीज को भर्ती नहीं किया गया। अस्पताल में मौजूद वार्डों में दवाओं के डब्बे नजर आए। अस्पताल को 6 जिलों के लिए औषधालय डिपो बना दिया है।
धौलपुर. यहां मौजूद चिकित्सालय में भी पिछले कई सालों से एक भी मरीज भर्ती नहीं किया गया है। चिकित्सकों ने बताया कि जगह के अभाव और स्टाफ की कमी के कारण उन्होनें भर्ती करना ही बंद कर दिया है। जबकि यहां ओपीडी में बड़ी संख्या में मरीज आते हैं।
प्रदेश में 12 यूनानी अस्पताल हैं, लेकिन डॉक्टरों समेत अन्य व्यवस्थाओं के अभाव में किसी भी अस्पताल में मरीज भर्ती नहीं किया जा रहा है, लेकिन ओपीडी चालू है। स्टाफ और सुविधाओं में बढ़ोतरी के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजूंगा
मनमोहन खींची, निदेशक
निदेशक, यूनानी चिकित्सा विभाग
Published on:
11 Apr 2025 01:56 pm
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