राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों को स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण व ऋण की सुविधा परवान नहीं चढ़ पा रही है।
हालात यह है कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने में एक माह शेष हैं, लेकिन अभी तक एक भी व्यक्ति को इस योजना का लाभ नहीं मिल पाया है।
योजना के तहत नगर परिषद को सालभर में 171 लोगों को लाभान्वित करने का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन लाभान्वित करना तो दूर, लक्ष्य के मुकाबले आधे आवेदन भी नहीं आए हैं।
हालांकि पिछले दिनों से नगर परिषद की ओर से योजना में अधिकाधिक लोगों को लाभान्वित करने के लिए प्रचार-प्रसार पर जोर दिया जा रहा है, वहीं पार्षदों से ही योजना के तहत उनके वार्ड में पात्र लोगों के लिए आवेदन भराने का आग्रह किया गया है।
यह है योजना
आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों को राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत स्वरोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकार की ओर से अधिकतम दो लाख रुपए का ऋण मुहैया कराने का प्रावधान है।
रोजगार के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इसके लिए अभ्यर्थी को नगर परिषद में आवेदन करना होता है।
योजना के लिए गठित टास्क फोर्स द्वारा आवेदन की जांच कर ऋण देने की स्वीकृति दी जाती है। टास्क फोर्स में लीड बैंक ऑफिसर, जिला उद्योग अधिकारी, दो प्रमुख बैंकों के प्रबन्धक, नगर परिषद आयुक्त व परियोजना अधिकारी शामिल होते हैं।
टास्क फोर्स द्वारा चयन किए जाने पर ही आवेदक को ऋण दिया जाता है। हालांकि अभी तक योजना के लिए टास्क फोर्स की बैठक एक बार भी नहीं हो पाई है।
स्वर्ण जयन्ती शहरी रोजगार योजना का विकल्प
राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन को स्वर्ण जयन्ती शहरी रोजगार योजना के विकल्प के तौर पर माना जा रहा था।
जहां स्वर्ण जयन्ती शहरी रोजगार योजना में लक्ष्य के मुकाबले अधिक आवेदन आने के कारण कई लोगों को वंचित रहना पड़ता था, वहीं शहरी आजीविका मिशन में लोगों के आवेदन ही नहीं मिल पा रहे हैं।
हालांकि स्वर्ण जयन्ती शहरी रोजगार योजना में केवल बीपीएल परिवार ही पात्र थे, जबकि इस योजना में एक लाख से कम वार्षिक आय वाले परिवार भी पात्र हैं।
यह रहे कारण
सूत्रों के अनुसार योजना नई होने के कारण कर्मचारियों को इसके पूरे प्रावधानों की जानकारी नहीं होने व पर्याप्त प्रचार-प्रसार के अभाव में यह परवान नहीं चढ़ पाई है।
कई लोगों को योजना के संबंध में जानकारी नहीं है, दूसरी ओर योजना की औपचारिकताओं की प्रक्रिया जटिल होने के कारण भी इसमें समय लग रहा है। टास्क फोर्स की बैठक के लिए सभी अधिकारियों के एक साथ होना भी आवश्यक है।
आवेदनकर्ता को तहसीलदार से प्रमाणित आय प्रमाण-पत्र भी लगाना होता है। इसकी प्रक्रिया भी काफी जटिल है, वहीं स्वर्ण जयन्ती शहरी रोजगार योजना से इसकी तुलना की जाए तो स्वर्ण जयन्ती में कुल ऋण पर 25 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान था, जबकि इस योजना में ऋण पर ब्याज के सात प्रतिशत ही अनुदान देने का प्रावधान है।
ऐसे में स्वर्ण जयन्ती शहरी रोजगार योजना के मुकाबले इस योजना में लोग रुचि नहीं दिखा रहे हैं। लोगों का कहना है कि योजना के प्रावधानों का सरलीकरण किया जाना चाहिए। ताकि योजना के प्रति लोगों का रूझान बढ़ सके।
योजना देरी से शुरू
लोग योजना में अभी रुचि नहीं दिखा रहे हैं। लोगों को इसके नियमों की सही जानकारी भी नहीं है। योजना इस वित्तीय वर्ष में देरी से शुरू हुई।
हालांकि नगर परिषद की ओर से पर्याप्त प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। कुछ लोगों के आवेदन भी आए हैं। जल्द ही टास्क फोर्स की बैठक बुलाकर आवेदनों पर विचार किया जाएगा।